
Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
चीन एक बार फिर साउथ एशिया में अपनी कनेक्टिविटी रणनीति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. इसी रणनीति का हिस्सा है प्रस्तावित चीन-म्यांमार-बांग्लादेश आर्थिक कॉरिडोर (China-Myanmar-Bangladesh Economic Corridor – CMBEC). ये परियोजना चीन के युन्नान प्रांत को म्यांमार के रास्ते बांग्लादेश से जोड़ने की परिकल्पना करती है. हालांकि फिलहाल ये योजना कई राजनीतिक और सुरक्षा कारणों से आगे नहीं बढ़ सकी है, लेकिन अगर भविष्य में इसे लागू किया जाता है तो इसका असर केवल तीन देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे साउथ एशिया की रणनीतिक तस्वीर बदल सकती है.
भारत की सबसे बड़ी चिंता उसके पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा है. प्रस्तावित कॉरिडोर भारत के बेहद संवेदनशील क्षेत्रों के करीब से गुजरता है. विशेष रूप से सिलिगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है, भारत के लिए रणनीतिक जीवनरेखा है क्योंकि यही हिस्सा पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है. अगर चीन इस क्षेत्र के आसपास अपनी आर्थिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का विस्तार करता है तो भारत के लिए सुरक्षा और निगरानी संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं. बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भविष्य में रणनीतिक या सैन्य महत्व भी हासिल कर सकते हैं.
CMBEC का दूसरा बड़ा प्रभाव बंगाल की खाड़ी में देखने को मिल सकता है. ये कॉरिडोर चीन को समुद्र तक सीधी पहुंच देने की क्षमता रखता है. इससे चीन मलक्का स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता कुछ हद तक कम कर सकता है. भारत लंबे समय से बंगाल की खाड़ी में प्रमुख सुरक्षा भागीदार की भूमिका निभाता रहा है, लेकिन अगर चीन बांग्लादेश के बंदरगाहों और समुद्री ढांचे में अपनी मौजूदगी बढ़ाता है तो क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल सकता है. यही कारण है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है.

हालांकि ये परियोजना कागजों पर महत्वाकांक्षी दिखाई देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई बाधाओं का सामना कर रही है. सबसे बड़ी चुनौती म्यांमार की राजनीतिक अस्थिरता और वहां जारी आंतरिक संघर्ष है. 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद देश में लगातार हिंसा और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है. दूसरी तरफ, बांग्लादेश भी इस परियोजना पर अंतिम फैसला लेने से पहले सभी पक्षों का आकलन कर रहा है. ढाका चीन के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाना चाहता है, लेकिन वो भारत समेत अन्य साझेदार देशों के साथ अपने संबंध भी संतुलित रखना चाहता है.
भारत को केवल इस परियोजना का विरोध करने के बजाय अपनी कनेक्टिविटी योजनाओं को तेज करना चाहिए. भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग, कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट, BBIN और BIMSTEC जैसे क्षेत्रीय नेटवर्क को समय पर पूरा करना भारत के लिए अधिक प्रभावी जवाब हो सकता है. इसके अलावा भारत को बांग्लादेश और म्यांमार के साथ व्यापार, डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग, सीमा अवसंरचना और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना होगा. इससे भारत क्षेत्र में एक भरोसेमंद विकास साझेदार के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा.
अगर ये परियोजना लंबे समय तक अटकी रहती है तो भारत के पास अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध और मजबूत करने का अवसर होगा. भारत बांग्लादेश और म्यांमार में आधारभूत ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल सेवाओं और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर अपनी क्षेत्रीय भूमिका मजबूत कर सकता है. साथ ही BIMSTEC जैसे मंचों के जरिए भारत पारदर्शी, टिकाऊ और समावेशी कनेक्टिविटी मॉडल को बढ़ावा देकर चीन के विकल्प के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है.
CMBEC क्या है?
ये चीन, म्यांमार और बांग्लादेश को सड़क, रेल और व्यापारिक नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्तावित आर्थिक कॉरिडोर है.
भारत को इससे चिंता क्यों है?
ये परियोजना भारत के पूर्वोत्तर, सिलिगुड़ी कॉरिडोर और बंगाल की खाड़ी में चीन की रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा सकती है.
ये परियोजना अभी तक शुरू क्यों नहीं हुई?
म्यांमार की राजनीतिक अस्थिरता, सुरक्षा चुनौतियां और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा इसकी सबसे बड़ी बाधाएं हैं.
भारत को क्या करना चाहिए?
भारत को अपनी कनेक्टिविटी परियोजनाएं तेज करनी चाहिए और बांग्लादेश व म्यांमार के साथ आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग बढ़ाना चाहिए.
अगर CMBEC नहीं बनता तो भारत को क्या फायदा होगा?
भारत को क्षेत्रीय नेतृत्व मजबूत करने, व्यापार बढ़ाने और BIMSTEC व एक्ट ईस्ट नीति को आगे बढ़ाने का बेहतर अवसर मिलेगा.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.