नई दिल्ली: भारत से एलएसी पर तनाव पैदा कर रहे चीन ने गलत वक्‍त पर यह चाल चली है और उसके लिए यह मुश्‍किल ला सकती है. यह बात राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के थिंकटैंक और अर्थ विशेषज्ञ स्वामीनाथन गुरुमूर्ति ने कही है.Also Read - SCO समिट: PM मोदी ने बढ़ती कट्टरपंथी विचारधारा को लेकर चेताया, अफगानिस्तान का उदाहरण दिया

भारत- चीन के बीच सीमा पर तनाव के बीच आरएसएस विचारक स्वामीनाथन गुरुमूर्ति ने शनिवार को कहा कि चीन ने अपनी वित्तीय स्थिति अत्यधिक ऋणग्रस्त होने के बावजूद गलत चाल चली है. Also Read - RSS पर विवादित बयान देने पर राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए विचार कर रहे हैं: MP के गृह मंत्री

गुरुमूर्ति ने कहा कि जीडीपी की तुलना में चीन का अनुपातिक ऋण 250 प्रतिशत है. इस तरह के अस्थिर ऋण स्तर और वैश्विक बाजार पर निर्भरता के बीच उसे राजनीति में इस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए. Also Read - विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीनी समकक्ष वांग यी से की मीटिंग, पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी पर चर्चा की

गुरुमूर्ति ने जेएनयू द्वारा आयोजित ‘कोविड-19: विश्व और भारत’ पर 10वें प्रोफेसर पी एन श्रीवास्तव स्मृति व्याख्यान को संबोधित करते हुए कहा, ‘चीन ने गलत चाल चली है. उसे पता नहीं है कि ऐसे समय में कैसी चाल चली जाती है.’

राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के थिंकटैंक ने कहा, ‘चीन ने एक साथ कई मोर्चे खोल दिये हैं. विशाल उत्पादन ढांचे के बावजूद उसकी वित्तीय हालत बहुत अच्छी नहीं है, क्योंकि उसका ऋण स्तर काफी अधिक है.’ उन्होंने कहा कि चीन को ऐसी हालत में ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए.

बता दें कि भारत ने लद्दाख की गैलवान घाटी में 15-16 जून की रात को हिंसक आमने-सामने की लड़ाई में एक कर्नल सहित अपने 20 सैन्यकर्मियों को खो दिया है. इससे पहले चीन ने 1967 के संघर्ष के बाद नाथू ला में भारत ने लगभग 80 सैनिकों को खो दिया था, जबकि चीनी पक्ष की मृत्यु 300 से अधिक थी.