नई दिल्लीः पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) शिवशंकर मेनन ने बुधवार को कहा कि डोकलाम गतिरोध पर चीनी राजनीतिक लक्ष्य भारत और भूटान को बांटना था. हालांकि, सरकार ने जिस तरह से मुद्दे को संभाला, इसके लिए उन्होंने उसकी तारीफ की. पूर्व के संप्रग शासन में वर्ष 2010 से 2014 के बीच एनएसए रह चुके मेनन ने यह भी कहा कि देश की सीमा का ध्यान रखने के लिए एकीकृत रूख की जरूरत है.Also Read - Ashes 2021: एशेज सीरीज के लिए 'भारत' से मिलेगी इंग्लैंड को मदद, खुद कप्तान Joe Root ने कर दिया खुलासा

उन्होंने यहां एक सम्मेलन में कहा कि एक कारण है कि पिछले साल हमने डोकलाम में जो गतिविधि देखी इसलिए नहीं कि उनके (चीन) पास स्पष्ट सैन्य विकल्प या विशिष्टता थी बल्कि भूटानियों को हमसे अलग करने का राजनैतिक लक्ष्य था. भारत और भूटान का करीबी संबंध है और नई दिल्ली भूटान को सैन्य समर्थन देता है. Also Read - भारत में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने वाला पहला छोटे कद का शख्‍स, ऊंचाई सिर्फ 3 फीट

उन्होंने कहा कि चीन भूटानियों को दिखाना चाहता था कि भारत अपनी हिफाजत नहीं कर सकता और (इस पर) भूटान को भड़काने की भी कोशिश की . प्रतिक्रिया का जो जरिया हमने चुना उस पर मुझे फख्र है. मेनन अक्तूबर 2006 से अगस्त 2009 तक भारत के विदेश सचिव भी रहे. सीमा प्रबंधन के विविध पहलुओं का जिक्र करते हुए मेनन ने कहा कि सैन्य बलों को ऐसे मुद्दों पर पूर्वोत्तर के राज्यों के सीमाई क्षेत्र के लोगों को भरोसे में लेना चाहिए. Also Read - दक्षिण अफ्रीका दौरे पर केवल टेस्ट और वनडे मैच खेलेगी टीम इंडिया, टी20 सीरीज को लेकर फैसला बाद में: जय शाह

इससे पहले सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा कि डोकलाम के हालात अच्छे हैं और परेशान होने की कोई वजह नहीं है. रावत से जब पत्रकारों ने डोकलाम के हालात के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि चिंता करने की कोई बात नहीं है. वहां हालात अच्छे हैं.

73 दिन चला था डोकलाम पर गतिरोध
अगस्त 2017 के आखिरी सप्ताह में भारत-चीन के बीच 73 दिन तक चला डोकलाम विवाद खत्म हुआ था. दोनों देश डोकलाम से अपनी-अपनी सेनाएं हटाने पर सहमत हो गए. तब इसे भारत की एक बड़ी जीत माना गया. हालांकि चीन ने भी अपनी जीत के दावे करते हुए कहा था कि वह सीमा पर गश्त जारी रखेगा. चीन तीन मोर्चों से भारत को युद्ध की धमकी दे रहा था. कभी सरकारी मीडिया के जरिए, कभी अपने थिंकटैंक के जरिए तो कभी मंत्रालयों के जरिए उसने भारत को प्रभाव में लेने की भरपूर कोशिश की.