नई दिल्ली। चीनी सेना के जवानों के एक समूह ने पिछले महीने पूर्वी लद्दाख के डेमचोक इलाके में करीब 300 मीटर तक घुसपैठ की और क्षेत्र में चार टेंट लगाए. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि चीन के जवान घुमंतू जाति के रूप में भारतीय सीमा में घुस आए और उन्होंने टेंट लगा लिए. Also Read - चीन से तनाव: रक्षामंत्री ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों और Chief of Defence Staff की मीटिंग की

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सूत्रों ने कहा कि जुलाई के पहले सप्ताह में घुसपैठ हुई और कुछ दिन बाद भारतीय पक्ष द्वारा उनके स्थानीय कमांडर के सामने आधिकारिक रूप से यह मुद्दा उठाने के बाद चीनी सैनिकों द्वारा पांच में से चार तंबू हटा लिए गए.

सूत्रों ने कहा कि इस तरह की घुसपैठ सामान्य नहीं है और चीनी अधिकारियों के साथ उचित मंच पर इन घटनाओं का मुद्दा उठाया जाएगा. भारत और चीन करीब चार हजार किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चीनी सेना द्वारा भारतीय सीमा में घुसपैठ की घटनाएं 2016 में 273 से बढ़कर 2017 में 426 हो गई हैं.

डोकलाम में बने थे गतिरोध वाले हालात

बता दें कि पिछले साल चीन ने भूटान के पास डोकलाम में इसी तरह का विवाद पैदा हुआ था. जून 2017 में भारत और चीन के जवानों के बीच डोकलाम क्षेत्र में गतिरोध उस समय शुरू हुआ जब भारत के साथ करीबी कूटनीतिक और सैन्य संबंध रखने वाले भूटान ने इन तीनों देशों से लगने वाले क्षेत्र के करीब रणनीतिक इलाके में एक सड़क बना रहे पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों के बारे में बीजिंग के सामने विरोध दर्ज किया था. भारत की इस कार्रवाई के बाद चीन भारत को पीछे हटने के लिए कह रहा था. लेकिन भारत टस से मस नहीं हुआ.

‘डोकलाम पर चीन को भारत से इतने सख्त जवाब का अंदाजा नहीं था’

चीन का कहना था कि भारत अपने सैनिक बगैर किसी शर्त के हटाए और उसके बाद ही दोनों देशों के बीच बातचीत हो पाएगी. वहीं भारत ने साफ कर दिया कि चीन के साथ 2012 में इस बात पर सहमति बन गई थी कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के मामले में सभी संबंधित देशों को शामिल करने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जाएगा. भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि ‘इस त्रिमुहाने के बारे में कोई भी एकतरफा फैसला उस सहमति का उल्लंघन है.’

चीन के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके में सड़क निर्माण की कोशिश करने के बाद इलाके में तनातनी शुरू हुई. भारत में इस क्षेत्र को डोका ला नाम से बुलाता है, भूटान इसे डोकलाम कहता है, जबकि चीन इसे अपने डोंगलांग क्षेत्र का हिस्सा बताता है.

डोकलाम गतिरोध करीब ढाई महीनों के बाद सुलझ पाया था. भारत और चीन अपनी-अपनी सेनाओं को पीछे हटाने के लिए तैयार हो गए. दोनों देशों की सेनाएं धीरे-धीरे अपनी जवानों को वापस बुलाने पर सहमत हो गई थी. लंबे समय से दोनों देशों के बीच इसे लेकर बातचीत हो रही थी. एनएसए अजीत डोवाल भी बैठक के सिलसिले में चीन पहुंचे थे.