शाहजहांपुर (यूपी): चिन्मयानंद को डॉक्टरों ने गुरुवार को लखनऊ के केजीएमयू रेफर किया लेकिन वह अपना इलाज आयुर्वेद से कराने की बात कहकर मेडिकल कॉलेज से आश्रम लौट गए. चिन्मयानंद को स्वास्थ्य खराब होने के कारण शाहजहांपुर के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था जहां हालत ज्यादा खराब होने के चलते उन्हें डॉक्टरों ने केजीएमसी लखनऊ रेफर कर दिया. परंतु चिन्मयानंद अपना इलाज आयुर्वेद से कराने की बात कहकर मेडिकल कॉलेज से अपने आश्रम लौट गए. राजकीय मेडिकल कॉलेज की जन संपर्क अधिकारी डॉक्टर पूजा पांडे ने बताया कि चिन्मयानंद को यहां मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था. उनको डायबिटीज, दस्त और हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत थी. उन्होंने बताया कि इसके अलावा उनके हृदय में रक्त की आपूर्ति कत हो रही थी. उनकी आयु 72 वर्ष है, ऐसे में दिल का दौरा पड़ने का भी खतरा है. डॉक्टर पूजा ने बताया कि इसी कारण चिन्मयानंद को केजीएमसी लखनऊ रेफर किया गया.

दूसरी ओर चिन्मयानंद के अधिवक्ता ओम सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने चिन्मयानंद को केजीएमसी रेफर किया था लेकिन वह वहां ना जाकर अपने दिव्य धाम वापस आ गए हैं. उनका कहना है कि वह आयुर्वेद पद्धति से अपना इलाज कराएंगे और ठीक हो जाएंगे. अधिवक्ता के मुताबिक आयुर्वेद के डॉक्टर चिन्मयानंद के आवास पर पहुंच गए हैं और उनका इलाज शुरू कर दिया है. इससे पहले विधि की छात्रा के साथ कथित बलात्कार के मामले में चिन्मयानंद के एक इंटर कॉलेज में अध्यापन का कार्य कर रही पीड़िता की मां से जुड़े सभी रिकॉर्ड कॉलेज प्राचार्य ने गुरुवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंपे.

एसआईटी ने स्वामी चिन्मयानंद पर रेप आरोप लगाने वाली लॉ छात्रा का करावाया मेडिकल टेस्‍ट

मुमुक्षु आश्रम के प्रशासनिक सूत्रों ने आज बताया कि पीड़िता की मां को मई 2019 में चिन्मयानंद के स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय में बतौर अध्यापक नियुक्त की गई थी. एसआईटी ने इससे जुड़ी पूरी जानकारी मांगी थी, जो प्राचार्य ने आज उन्हें सौंप दी. चिन्मयानंद पर लगे बलात्कार और अन्य आरोपों के मामले में एसआईटी भाजपा नेता की ओर से दर्ज कराए गए रंगदारी के मामले, पीड़िता के पिता की ओर से दर्ज कराए गए अपहरण एवं जान से मारने की धमकी के मामले और पीड़िता द्वारा दिल्ली में दिए गए 12 पेज के प्रार्थना पत्र को आधार बनाकर जांच कर रही है.

एसआईटी प्रमुख नवीन अरोड़ा ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, ‘हमें 23 सितंबर तक पूरी जांच रिपोर्ट इलाहाबाद उच्च न्यायालय को देनी है. हम विवेचना में दोनों मामलों में कड़ी से कड़ी जोड़ रहे हैं.’ उन्होंने बताया कि इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. वहीं, मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराने के बाद पीड़ित छात्रा ने चिन्मयानंद की जल्द गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि अगर सरकार उसके मरने का इंतजार कर रही है तो वह आत्मदाह कर लेगी. अरोड़ा ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि शीर्ष अदालत के निर्देश पर मुख्य सचिव ने एसआईटी का गठन किया है. उन्होंने बताया कि टीम ने मुमुक्षु आश्रम परिसर देखा तथा जरुरत के अनुसार कॉलेजों के प्राचार्य तथा स्टाफ से पूछताछ की. दोनों वादीगणों को भी बुलाया गया और उनके बयान दर्ज किए गए. उनसे भी सवाल-जवाब किए गए और पीड़िता का बयान भी लिया गया. उन्होंने बताया कि पीड़िता की ओर से दिल्ली पुलिस को दी गयी शिकायत पर संज्ञान लेते हुए धारा 164 में उसका बयान दर्ज कराया गया है.

BJP नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद के बाद SIT ने शुरू की पीड़ित छात्रा से पूछताछ

अरोड़ा ने बताया कि मोबाइल, पेन ड्राइव तथा गवाहों के मोबाइल सीज कर उन्हें फॉरेंसिक लैब भेजा गया है. वहीं, पीड़िता का आरोप है कि मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान होने के तीन दिन बाद भी ना तो बलात्कार और शारीरिक शोषण का मामला दर्ज हुआ है और ना हीं चिन्मयानंद को गिरफ्तार किया गया है. पीड़िता के पिता ने सवाल किया कि मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान होने के बाद भी चिन्मयानंद को गिरफ्तार नहीं करना और उसके खिलाफ मामला दर्ज नहीं होना कहां तक सही है. उन्होंने कहा कि एसआईटी भी उन्हें कोई जानकारी नहीं दे रही है. ऐसे में वह वकीलों से परामर्श करेंगे. एसआईटी ने स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय जिस जमीन पर बना है, उसके अभिलेख, खसरा खतौनी आदि मांगे हैं. इसके अलावा कुछ छात्रों का शैक्षिक रिकार्ड भी मांगे हैं.

उल्लेखनीय है कि स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय में पढ़ने वाली एलएलएम की छात्रा ने 24 अगस्त को एक वीडियो वायरल कर चिन्मयानंद पर शारीरिक शोषण करने, कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए उसे तथा उसके परिवार की जान को खतरा बताया था. इस संबंध में पीड़िता के पिता की ओर से कोतवाली शाहजहांपुर में चिन्मयानंद के खिलाफ अपहरण और जान से मारने की धमकी देने का मामला दर्ज किया. इससे ठीक एक दिन पहले चिन्मयानंद के अधिवक्ता ओम सिंह ने पीड़िता और उसके परिवार के खिलाफ पांच करोड़ रुपए की रंगदारी मांगने का मामला दर्ज कराया था.