नई दिल्ली: केरल की चार ननों को पिछले साल रेप के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल की गिरफ्तारी की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन करने के बाद ट्रांसफर के आदेश दे दिए गए थे. हालांकि उन्हें शनिवार को तब राहत मिली, जब चर्च के अधिकारियों ने उनके ट्रांसफर आदेश को रद्द कर दिए और उन्हें यहां अपनी सेवाएं तब तक जारी रखने की अनुमति दी, जब तक यह मामला अदालत में चल रहा है. सिस्टर अनुपमा ने कहा, हमें जालंधर के नए बिशप से एक पत्र मिला है, जिसमें कहा गया है कि जब तक मामला खत्म नहीं हो जाता, सभी ट्रांसफर की गई ननों को कुरुविलांगड कॉन्वेंट में रखा जा सकता है.

ट्रांसफर आदेशों को निरस्त करने की खबर चार ननों में से एक सिस्टर अनुपमा ने यहां आयोजित एक सार्वजनिक बैठक में पढ़ी. जिस तरीके से उनका ट्रांसफर किया गया था यह बैठक उसके विरोध में आयोजित की गई थी. ‘विरोध’ बैठक में ईसाई समाज की अच्छी भागीदारी देखी गई, लेकिन मुसीबत तब पैदा हुई, जब बिशप फ्रैंको के हमदर्द समझे जाने वाले पांच लोगों ने कार्यक्रम स्थल पर उत्पात मचाया.पांच प्रदर्शनकारियों को तुरंत हिरासत में ले लिया गया और कार्यक्रम स्थल से हटा दिया गया.

पिछले महीने, इन चार ननों को जो वर्तमान में कुरुविलांगड कॉन्वेंट से जुड़ी हुई हैं, उन्हें देश में चार अलग-अलग स्थानों पर स्थानांतरित किया गया था. उन्होंने केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकलते देख शनिवार को विरोध बैठक आयोजित करने का फैसला किया.

2014 और 2016 के बीच ननों के यौन उत्पीड़न के आरोपी जालंधर के पूर्व बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ मामले में ये चार नन गवाह हैं. मुलक्कल को 21 सितंबर, 2018 को दुष्कर्म के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था, जब चार ननों ने कोच्चि में एक सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस को बिशप के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा. मुलक्कल को 16 अक्टूबर, 2018 को जमानत मिली थी, और अब वह दोबारा पंजाब में ही हैं, लेकिन उन्हें डायोसिस प्रमुख के पद से हटा दिया गया है.