नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) पारित हो गया है. राज्यसभा में मतदान के दौरान बिल संशोधन के पक्ष में 125 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 105 वोट पड़े. नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में पहले ही पास हो चुका है. कई घंटों की बहस के बाद ये बिल राज्यसभा में इस बिल को लेकर मतदान हुआ. गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष के सवालों के जवाब में अपनी बात रखी. इसके बाद वोटिंग हुई. इससे पहले इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव लाया गया. इसके लिए वोटिंग हुई, लेकिन ये प्रस्ताव गिर गया. प्रस्ताव को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने के लिए 124 वोट पड़े, जबकि भेजने के पक्ष में 99 वोट पड़े. भेजने के पक्ष में कम वोट पड़ने के कारण ये प्रस्ताव गिर गया. इसके बाद बिल संशोधन के लिए वोटिंग हुई. सोनिया गांधी ने इस बिल के पास होने के बाद कड़ी आलोचना की है. कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि आज संवैधानिक इतिहास का काला दिन है. छोटी सोच जीत गई है. ये भारत की बहुलतावाद सोच पर बड़ा हमला है.

क्या इस बिल में
विधेयक में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लिए भारत की नागरिकता पाने का रास्ता साफ़ हो गया है. इसमें सिर्फ मुस्लिमों को छोड़ दिया गया है. 31 दिसंबर 2014 तक इन देशों से भारत में शरण लेने के लिए आए इन धर्मों के लोगों को नागरिकता मिल जाएगी. मुस्लिमों को छोड़ इन समुदायों को छह वर्ष यहां निवास करने पर नागरिकता दी जाएगी. ऐसे लोगों के पास कोई उचित दस्तावेज नहीं होने पर भी उन्हें नागरिकता दी जा सकेगी. मुस्लिमों को छोड़ दिए जाने के कारण इस बिल का विरोध हो रहा है. विपक्ष का कहना है कि धर्म के आधार पर नागरिकता देश के संविधान पर हमला है. ये नई मुश्किलें पैदा हो सकती हैं.

नागरिकता संशोधन ब‍िल के विरोध में असम में उग्र प्रदर्शन, गुवाहाटी में लगा कर्फ्यू

इसलिए हो रहा विरोध
कांग्रेस सहित दल इसका विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस ने इससे पहले इस बिल को धार्मिक आधार पर नागरिकता देने के प्रावधानों को विभाजनकारी करार दिया. कांग्रेस ने कहा कि ये विधेयक संविधान के विरुद्ध है. कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार की यह दलील तर्कसंगत नहीं है कि पिछले 70 सालों में अन्य देशों से भारत आने वाले प्रताड़ित लोगों को नागरिकता नहीं दी गई. गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा में पेश विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए उच्च सदन में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि आपके द्वारा लाया गया बिल भारतीय संविधान की नींव पर हमला है, यह भारत गणराज्य पर हमला है. इससे भारत की आत्मा आहत होती है. यह हमारे संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है. यह नैतिकता परीक्षण में विफल रहता है. शर्मा ने कहा कि इससे पहले पड़ोसी देशों से ही नहीं, बल्कि श्रीलंका, केन्या और युगांडा सहित अन्य देशों से भी भारत आने वाले शरणार्थियों को शरण दी गई. इसके लिए नागरिकता कानून में 9 बार संशोधन किया गया, लेकिन एक बार भी धार्मिक आधार पर नागरिकता नहीं दी गई.

वहीं, शिवसेना ने भी इसे लेकर निशाना साधा. शिवसेना के नेता संजय राउत ने भाजपा पर यह कहते हुए कटाक्ष किया कि हमें किसी से देशभक्ति का प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है. आप जिस स्कूल में पढ़ रहे हो, हम वहां के हेडमास्टर हैं.उच्च सदन में सीएबी पर चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि यह कहा जा रहा है कि जो इस विधेयक का विरोध कर रहा है वह देशद्रोही है और जो इसका समर्थन कर रहा है वह देशभक्त है.

देश भर में प्रदर्शन, बिल का असम में बड़ा विरोध
वहीं, नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ देश भर विरोध प्रदर्शन हो रहा है. असम में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं. राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प से राज्य में अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई है. इसके चलते केंद्र ने पैरा मिलिट्री फोर्सेस के 5000 हजार से अधिक जवानों को उत्‍तर-पूर्व के अशांत इलाकों में भेजने का आदेश दिया है. हालांकि, किसी भी पार्टी या छात्र संगठन ने बंद, प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया है.दिल्ली में अधिकारियों ने बताया कि नागरिकता विधेयक को लेकर विरोध के मद्देनजर शांति का माहौल सुनिश्चित करने के वास्ते अर्द्धसैनिक बलों के पांच हजार जवानों को पूर्वोत्तर भेजा जा रहा है. केंद्र ने बुधवार को असम सहित पूर्वोत्तर राज्यों में अर्द्धसैनिक बल के 5000 जवानों को विमान से भेजा है. अधिकारियों ने बताया कि संसद में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के खिलाफ वहां हो रहे विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जवानों को वहां भेजा गया है.