नई दिल्ली. लोकसभा ने मंगलवार को उस विधेयक को मंजूरी दे दी जिसमें नागरिकता कानून 1955 में संशोधन की मांग की गई है. इस विधेयक के कानून बनने के बाद, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 12 साल के बजाय छह साल भारत में गुजारने पर और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिल सकेगी. इस विधेयक को मंजूरी मिलने से पूर्वोत्तर राज्यों की सियासत में अचानक गर्माहट आ गई है. क्योंकि एक तरफ जहां असम में इस विधेयक में संशोधन को लेकर पिछले कई दिनों से आंदोलन हो रहा है. वहीं, मेघालय में भाजपा की सहयोगी कोनराड संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) ने भी संबंध तोड़ने के ‘संकेत’ दिए हैं. खासकर असम में सत्तारूढ़ भाजपा को इस विधेयक को लेकर भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. सोमवार को जहां इस मामले को लेकर असम गण परिषद ने राज्य सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था, वहीं मंगलवार को लोकसभा से बिल के पास होने के बाद पार्टी के एक प्रवक्ता ने विरोध स्वरूप इस्तीफा दे दिया. इसके अलावा, पूर्वोत्तर में भाजपा की सहयोगी मेघालय के सीएम कोनराड संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी ने भी पार्टी के साथ अपने संबंध तोड़ने के संकेत दिए हैं.

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विधेयक पारित होते ही भाजपा प्रवक्ता ने दिया इस्तीफा
लोकसभा में नागरिकता (संशोधन) विधेयक पारित होने के कुछ ही देर बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता मेहदी आलम बोरा ने इसके विरोध में मंगलवार को पार्टी के सभी पदों से त्याग पत्र दे दिया. इस विधेयक के विरोध में बोरा पहले ऐसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं, जिन्होंने इसके विरोध में भाजपा छोड़ी है. उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास को अपना त्यागपत्र सौंपा है. बोरा ने अपने त्यागपत्र में लिखा है, ‘‘मैं नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करता हूं. मैं सही अर्थों में महसूस करता हूं कि इससे असमी समाज को हानि होगी.’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह विधेयक असमी समाज के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को प्रभावित करेगा. इसलिए मैं लगातार इसका विरोध करता आ रहा हूं.’’ बोरा ने कहा, ‘‘लोकसभा में इस विधेयक के पारित होने के बाद मैं भाजपा से सहमत नहीं हो सका और इसलिए मैं पार्टी की प्राथमिक सदस्यता सहित सभी पदों से इस्तीफा दे रहा हूं.’’

नागरिकता संशोधन विधेयक का क्या है हिन्दू-मुस्लिम एंगल और क्यों हो रहा है विरोध

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कोनराड संगमा ने कहा- पार्टी नेताओं से विमर्श के बाद तोड़ेंगे संबंध
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने मंगलवार को नागरिकता (संशोधन) विधेयक के लोकसभा में पारित होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि भाजपा से संबंध तोड़ने के मुद्दे पर वह अपनी नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के नेताओं से चर्चा करेंगे. संगमा ने पत्रकारों से कहा, “इस विधेयक का पारित होना दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि हमने इसका व्यापक तौर पर विरोध किया है.” एनपीपी के अध्यक्ष संगमा ने कहा कि मेघालय मंत्रिमंडल ने इस विधेयक के किसी भी तरह के क्रियान्वयन के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है. यह पूछे जाने पर कि क्या एनपीपी राजग से संबंध तोड़ेगी? मुख्यमंत्री ने कहा, “हम इस पर विचार करेंगे और पार्टी के सभी नेताओं से चर्चा करेंगे. आपको पता है कि हमारी पार्टी की पूर्वोत्तर के सभी पांच राज्यों में उपस्थिति है. इसलिए मैं सभी पार्टी नेताओं को बुलाऊंगा और इसपर चर्चा करेंगे.”

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इधर, भाजपा ने कहा- अगप के जाने का कोई असर नहीं होगा
असम में लोकसभा की अधिकांश सीटें जीतने के विश्वास में, भाजपा ने मंगलवार को कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन से असम गण परिषद (अगप) के निकालने का कोई असर नहीं होगा. भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख रंजीत कुमार दास ने कांग्रेस और अखिल गोगोई की कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) को चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी पार्टी के 27 लाख कार्यकर्ता हैं और किसी को भी उन्हें भड़काना नहीं चाहिए. दास ने कहा, “2014 में हम अकेले लड़े और सात सीटें जीतीं. हमारी बीपीएफ के साथ साझेदारी है. इसके अलावा राभा, ट्वा, सोनोवाल और अन्य स्थानीय समूह हमारे साथ हैं. इसलिए, अगप के निकलने का कोई असर नहीं होगा और हमें 11 सीटें मिलेंगी.” प्रदेश में असम गण परिषद के राजग से बाहर निकलने के बाद अब भाजपा को बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ) के अलावा विधानसभा में एकमात्र निर्दलीय विधायक का समर्थन है. भाजपा नेता ने कहा, ‘‘हम कांग्रेस और केएमएसएस को चेतावनी देते हैं कि वह हमें उकसाए नहीं. हमारे पास 27 लाख कार्यकर्ता हैं. हम सरकार में हैं. हम पंचायत चुनाव में विजयी रहे हैं. अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए कांग्रेस और केएमएसएस जिम्मेदार होंगे.’’

इनपुट – एजेंसियां