नई दिल्ली: सोमवार को लोकसभा में 12 घंटे चली तीखी बहस के बाद लोकसभा द्वारा पारित नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) को आज राज्यसभा में पेश किया जाएगा. विधेयक के विरोध में विपक्षी दलों के लामबंद होने के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा को उम्मीद है कि बुधवार को यह विधेयक जब राज्यसभा में लाया जाएगा तो इसे आसानी से पारित करवा लिया जाएगा. गौरतलब है कि लोकसभा में नागरिकता बिल के पक्ष में 311 वोट मिले हैं और 80 वोट बिल के खिलाफ हैं. राज्यसभा में इस बिल को बहुमत से पास कराने के लिए भाजपा के शीर्ष नेता तैयारियों में जुटे हुए हैं.

राज्य सभा में कुल 240 सीटे हैं. विधेयक को पास कराने के लिए भाजपा को 121 सदस्यों का समर्थन चाहिए. एनडीए में अन्नाद्रमुक, जनता दल-यूनाइटेड और अकाली दल जैसी पार्टियां शामिल हैं. इनकी कुल संख्या सदन में 116 हैं. एनडीए को अन्य 14 लोगों के समर्थन की भी उम्मीद है. कुल मिलाकर अगर भाजपा की गणित सही बैठती है तो यह बहुमत के आंकड़े को पार कर 130 पहुंच जाएगा.

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भाजपा नीत राजग के सूत्रों ने बताया कि उसे 240 सदस्यों की प्रभावी संख्या वाली राज्यसभा में इस विधेयक पर मतदान में 124-130 लोगों के समर्थन मिल सकते हैं. बता दें कि सदन में भाजपा के 83, जद (यू) के 6, अकाली दल के 3 तथा लोजपा-आरपीआई..ए के 1-1 तथा 11 मनोनीत सदस्य शामिल हैं. भाजपा अन्नाद्रमुक से बात कर रही है जिसके 11 सांसद हैं. बीजद के सात सांसद, वाईएसआर कांग्रेस के दो तथा तेदेपा के दो सदस्य हैं. भाजपा को इन दलों के समर्थन की भी उम्मीद है . भाजपा को उम्मीद है कि इन दलों के समर्थन से वह 120 सदस्यों के बहुमत के आंकड़े को प्राप्त कर लेगी .

भाजपा की पूर्व सहयोगी पार्टी शिवसेना के राज्य सभा में कुल 14 सदस्य हैं. इनमें से तीन वोट्स नागरिकता बिल के समर्थन में जाने की उम्मीद है. लोकसभा में बिल को लेकर शिवसेना के एक सांसद ने भी समर्थन दिया था. हालांकि महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के बयान के बाद यह निश्चित नहीं है कि राज्य सभा में क्या शिवसेना बिल के समर्थन में होगी या नहीं. हालांकि बावजूद इसके भाजपा के पास बहुमत के आंकड़े को छूने का मौका रहेगा जिसका प्रयास भाजपा करने में जुटी हुई है.

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राज्यसभा में संख्या की अगर बात करें तो- ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बीजद के सात सदस्य, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी के वाईएसआरसीपी के दो और चंद्रबाबू नायडू के टीडीपी के 14 गैर-गठबंधन वाले सांसदों में से एक हैं.

कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के 64 सदस्य हैं और उम्मीद करते हैं कि 46 अन्य, जैसे तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), बिल का विरोध करने के लिए. कुल मिलाकर सदस्यों की सख्या 110 हो जाएगी. राज्य सभा में टीआरएस के पास कुल 6 सदस्य हैं. अक्सर विपक्ष के विधेयकों का विरोध करने के बावजूद इस बार पार्टी के शीर्ष नेताओ ने विधेयक को लेकर भाजपा को समर्थन दिया है. अमर सिंह जैसे कुछ सदस्य स्वास्थ्य या अन्य व्यक्तिगत कारणों से सदन में उपस्थित नहीं हो सकते हैं.