नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सोमवार यानी आज लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) पेश करेंगे. यह विधेयक लोकसभा के दैनिक कामकाज के तहत सूचीबद्ध है. राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस विधेयक को लेकर विपक्ष की ओर से विरोध के स्वर उठ रहे हैं. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले बुधवार को इस विधेयक को मंजूरी दी थी. मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक में भारत के हितों को ध्यान में रखा जाएगा.

 

उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि जब विधेयक के प्रावधानों की घोषणा होगी तो असम समेत पूर्वोत्तर और संपूर्ण भारत में इसका स्वागत किया जाएगा. मिली जानकारी के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम जहां इनर लाइन परमिट (आईएलपी) की व्यवस्था लागू है उसे सीएबी के दायरे से बाहर रखा जाएगा, जिसको लेकर 2019 के आम चुनाव में इलाके में राजनीतिक विवाद पैदा हुआ. आईएलपी भारत सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है जिसके तहत सुरक्षित इलाके में एक सीमित अवधि के लिए भारत के नागरिकों को यात्रा की अनुमति प्रदान की जाती है. सूत्रों ने बताया कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस विधेयक में असम, मेघालय और त्रिपुरा के जनजातीय इलाकों को छोड़ दिया जाएगा. ये ऐसे जनजातीय इलाके हैं जहां संविधान की छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त परिषद व जिले बनाए गए हैं.

इनको प्रदान की जाएगी भारत की नागरिकता
पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंग्लादेश में उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्मावलंबियों को नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के तहत भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी. इस विधेयक का विपक्ष ने पहले ही विरोध किया है. कांग्रेस ने इसे असंवैधानिक करार दिया है. विधेयक में मुस्लिम को छोड़ देने को लेकर अल्पसंख्यक गुटों ने भी इसका विरोध किया है. मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रविवार को एक प्रेसवार्ता के दौरान ऐलान किया कि वह प्रस्तावित विधेयक में दो संशोधन का प्रस्ताव पेश करेगी.