नई दिल्‍ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज बुधवार को राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक चर्चा के लिए पेश किया. वहीं, विपक्ष के चार सदस्यों ने यह विधेयक राज्यसभा की प्रवर समिति में भेजने का प्रस्ताव किया. बिले पेश करते हुए शाह ने कहा, आज में एक ऐतिहासिक बिल लेकर सदन में उपस्थित हुआ हूं. इस बिल के प्रावधान में, लाखों करोड़ों लोग जो नर्क की यातना का जीवन जी रहे हैं, उन्हें नई आशा दिखाने का ये बिल है.

शाह ने कहा कि विभाजन के बाद हमारी कल्पना थी कि जो नागरिक यहां अल्पसंख्यक रहते हैं और जो पड़ोसी देश में अल्पसंख्यक हैं, वो सम्मान के साथ जीवन जी पाएंगे, अपने धर्म का सम्मान के साथ पालन कर पाएंगे, अपने परिवार का सम्मान से रक्षण कर पाएंगे. लेकिन दशकों बाद इसकी तरफ हम देखते हैं तो कटु सच्चाई ये सामने आई है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान या अफगानिस्तान में अल्पसंख्यकों को सम्मान का जीवन नहीं मिला. वहां अल्पसंख्यकों की घोर प्रताड़ना हुई. शाह ने उच्‍च सदन में कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों में 20% की कमी आई है.

गृह मंत्री शाह ने कहा कि पाकिस्तान और उस समय के पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में लगभग 20- 20% अल्पसंख्यकों की आबादी कम हो चुकी है. आखिर कहां गए वो लोग, या तो वो मार दिए गए या धर्म परिवर्तन हो गया या वो लोग शरणार्थी बनकर अपने धर्म और सम्मान को बचाने के लिए भारत आ गए.

शाह ने कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि हम वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं, मैं उन सब साथियों को कहना चाहता हूं कि हमने चुनाव के पहले ही ये इरादा देश के सामने रखा था, जिसे देश की जनता ने समर्थन दिया है.

शाह ने कहा,गलत सूचना फैलाई गई है कि यह बिल भारत के मुसलमानों के खिलाफ है. मैं यह कहते हुए लोगों से पूछना चाहता हूं कि यह बिल भारतीय मुसलमानों से कैसे संबंधित है? वे भारतीय नागरिक हैं और हमेशा रहेंगे, उनके साथ कोई भेदभाव नहीं होगा.

भारत के किसी भी मुसलमान को इस विधेयक के कारण चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. अगर कोई आपको डराने की कोशिश करे तो घबराएं नहीं. यह नरेंद्र मोदी सरकार का संविधान के अनुसार काम करना है, अल्पसंख्यकों को पूरी सुरक्षा मिलेगी.

अमित शाह ने वोटबैंक की राजनीति के आरोप को खारिज किया और कहा कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में इस संबंध में घोषणा की थी.

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इस बिल में हम तीनों पडोसी देशों के धार्मिक अल्पसंख्यकों को संरक्षण देकर उनको नागरिक बनाने की प्रक्रिया का संशोधन लेकर आए हैं. साथ ही पूर्वोत्तर के राज्यों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए भी हम प्रावधान लेकर आए हैं.

शाह ने कहा कि इस बिल में हम तीनों पड़ोसी देशों के धार्मिक अल्पसंख्यकों को संरक्षण देकर उनको नागरिक बनाने की प्रक्रिया का संशोधन लेकर आए हैं. साथ ही पूर्वोत्तर के राज्यों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए भी हम प्रावधान लेकर आए हैं.

शाह ने कहा कि इस बिल में हम तीनों पड़ोसी देशों के धार्मिक अल्पसंख्यकों को संरक्षण देकर उनको नागरिक बनाने की प्रक्रिया का संशोधन लेकर आए हैं. साथ ही पूर्वोत्तर के राज्यों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए भी हम प्रावधान लेकर आए हैं.

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, भारत की आजादी के बाद तीन देशों से आए गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दी जाएगी. भारत के मुसलमान देश के नागरिक थे, हैं और बने रहेंगे, उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी.

शाह ने कहा, भारत दुनिया भर से आए मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता नहीं दे सकता, यह विधेयक तीन देशों में उत्पीड़न का सामना कर रहे अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए है.