नई दिल्ली: अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज करते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई (Rajnan Gogoi, Chief Justice of India ) ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में है और इसे अस्थिर करने के लिए ‘बड़े पैमाने पर षड्यंत्र’ रचा जा रहा है. Also Read - UPSC Exam: UPSC में शामिल होने के आखिरी मौके वाले उम्मीदवारों को झटका, नहीं मिलेगा कोई अन्य अवसर, जानें पूरा मामला

आरोपों से जुड़े मामले की तत्काल सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश गोगाई, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की तीन सदस्यीय पीठ ने मीडिया से “संयम , जिम्मेदारी और बुद्धिमत्ता से काम करने के लिए कहा, ताकि न्यायपालिका की छवि इन आधारहीन आरोपों से धूमिल न हो.” प्रधान न्यायाधीश गोगोई ने कहा, “जब तक मेरा कार्यकाल पूरा नहीं होता मैं इस पीठ में बैठूंगा और बिना डरे और निष्पक्षता के साथ अपना कर्तव्य निभाऊंगा.” Also Read - Chhattisgarh: शेल्‍टर होम में रह रही महिला से रेप, आरोप में आश्रय स्थल का प्रबंधक अरेस्‍ट

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मीडिया के एक धड़े में इस तरह के आरोपों के बारे में प्रकाशित रिपोर्ट्स पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, “चीजें बहुत दूर चली गई हैं. न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता… आपराधिक रिकॉर्ड वाली महिला के पीछे बहुत बड़ी ताकत है.” यह कहते हुए कि ‘न्यायपालिका को अस्थिर करने की एक बड़ी साजिश रची जा रही है, जो कि अब तक स्वतंत्र बना हुआ है’.

प्रधान न्यायाधीश ने सवाल किया, “इस तरह के आधारहीन आरोपों को देखते हुए, क्यों कोई व्यक्ति न्यायाधीश बनना चाहेगा, क्योंकि न्यायाधीशों के पास केवल प्रतिष्ठा ही है, और उस पर भी हमला किया जा रहा है?” सर्वोच्च न्यायालय के प्रशासन ने कहा कि ‘ये आरोप पूरी तरह से झूठे और अपमानजनक हैं और इन्हें पूरी तरह खारिज किया जाता है.’ सॉलिस्टिर जनरल तुषार मेहता द्वारा मामले की तत्काल सुनवाई का जिक्र करने के बाद, पीठ ने पूर्वाह्न् 10.30 बजे मामले की सुनवाई की.