नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दागी नेताओं के चुनावी राजनीति के भविष्य पर फैसला सुनाते हुए कहा कि चार्जशीट के आधार पर जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है. हालांकि, कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामले में संसद को तय करना चाहिए कि उसे क्या करना है. हालांकि, कोर्ट ने ये जरूर कहा है कि राजनीति का अपाधिकरण खत्म करना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि चुनाव लड़ने से पहले नेताओं को आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी चुनाव आयोग को देनी चाहिए. पार्टियों को भी अपने उम्मीदवारों की जानकारी वेबसाइट पर देनी चाहिए. कोर्ट ने ये भी कहा कि चुनाव लड़ने से पहले आपराधिक रिकॉर्ड वाले नेताओं को तीन बार प्रिंट मीडिया और एक बार इलेक्ट्रानिक मीडिया में अपने रिकॉर्ड की जानकारी देनी होगी.

बता दें कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति फली नरीमन, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर, न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदू मल्होत्रा की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ सुनवाई के दौरान साफ कर चुकी है कि वह न तो कानून बना सकती है और न ही संसद से आपराधिक छवि वाले नेता को चुनाव में भाग लेने से रोकने के लिए कानून बनाने के बारे में कह सकती है.

सीजेआई ने कहा था, हम कानून नहीं बना सकते
सीजेआई ने 28 अगस्त को बहस समाप्त करते हुए कहा था, हम कानून नहीं बना सकते और न ही अप्रत्यक्ष रूप से वैसा कुछ कर सकते हैं जो हम प्रत्यक्ष रूप से नहीं कर सकते. हम केवल यह देख सकते हैं कि हम खुलासे (आपराधिक मामलों में) में कुछ कर सकें. हम यह देखेंगे कि हम खुलासे में कुछ जोड़ सकें ताकि मतदान बूथों पर लोग अच्छी तरह से चुनाव कर सकें, लोगों को निर्णय लेने दीजिए.

सजा पाए लोगों को चुनाव लड़ने से रोका जाए
याचिका में कहा गया था कि पांच साल या इससे ज्यादा सजा का होने पर ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने से रोका जाए. अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका में आपराधिक मामलों में सजा पाने वालों पर आजीवन चुनाव लड़ने की पाबंदी लगाने की अपील की गई है. याचिका में राजनेताओं के ऐसे मामलों का ट्रायल एक साल के अंदर पूरा करने के लिए विशेष अदालत का गठन करने की भी मांग की गई है. याचिका में चुनाव लडऩे के लिए अधिकतम उम्र और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने की भी मांग की गई है. इस पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

बता दें कि लंबे समय से मांग होती रही है कि दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाए. गंभीर अपराध के आरोपी सांसदों और विधायकों के आजीवन चुनाव लड़ने पर पाबंदी की दिशा में केंद्र सरकार ने दिसंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में बताया कि उसने सांसदों और विधायकों से जुड़े गंभीर आपराधिक मामलों को निपटाने के लिए 12 विशेष अदालतों के गठन का फैसला किया है.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि ऐसे केसों का निपटारा एक साल के अंदर किया जाना चाहिए. इसके लिए उसने सरकार से ड्राफ्ट भी मांगा था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने दागी नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की थी.