नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करके कानून के उस प्रावधान को रद्द करने का अनुरोध किया गया है जो चुनाव प्रचार के दौरान होने वाले खर्च की अनुमति के संबंध में किसी राजनैतिक दल के उम्मीदवार और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच कथित रूप से भेद करता है. सोमवार को इस जनहित याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है.Also Read - PM Cares Fund सरकारी कोष नहीं है: PMO के अधिकारी ने हाईकोर्ट को बताया

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निर्दलीय उम्मीदवार के साथ भेदभाव

यह याचिका अधिवक्ता अमित साहनी की ओर से दिल्ली उच्च न्यायलय में दायर की गई है. इसके अंतर्गत यह दावा किया गया है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा- 77 के तहत किसी राजनीतिक दल के उम्मीदवार के लिये प्रचार पर खर्च की कोई सीमा नहीं है जबकि निर्दलीय उम्मीदवार को ऐसा कोई लाभ नहीं है. याचिकाकर्ता का कहना है कि यह धारा भेदभाव पूर्ण है.

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याचिकाकर्ता ने जनप्रतिनिधित्व कानून की उक्त धारा को अधिकार क्षेत्र से बाहर घोषित करने के निर्देश की मांग की है, जिसके अनुसार उम्मीदवार के लिए प्रचार में राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से किए गए खर्च को ऐसे उम्मीदवार का खर्च नहीं माना जाएगा. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की एक पीठ सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगी. ( इनपुट भाषा )