चेन्नई. एक महिला ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की जैविक बेटी होने की दावा की. महिला ने गुरुवार को मद्रास उच्च न्यायालय का रुख करते हुए अपील की कि जयललिता के पार्थिव शरीर का वैष्णव ब्राह्मण समुदाय के रीति रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया जाए.Also Read - Flight Fares: दीवाली नजदीक आते ही फ्लाइट के किराए में तेजी, केवल इन लोगों को ही मिलेगी जाने की इजाजत

न्यायमूर्ति एस वैद्यनाथन ने महिला की याचिका की विचारणीयता पर निर्णय लेने के लिए सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख तय की. महिला की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील वी प्रकाश ने जयललिता से रिश्ते का पता लगाने के लिए डीएनए परीक्षण के अनुरोध को शामिल करने के लिए याचिका में संशोधन का समय मांगा है. Also Read - Weather Forecast Today: चेन्नई और उपनगरों में भारी बारिश, खतरे के निशान से ऊपर जा सकते हैं पूंडी और सत्यमूर्ति सागर बांध; बाढ़ का अलर्ट जारी

महिला इसी अनुरोध के साथ पिछले महीने भी उच्चतम न्यायालय पहुंची थी लेकिन न्यायालय ने इस पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था. महिला ने दावा किया कि उसे जयललिता की बहन और उनके पति को गोद दे दिया गया था. हालांकि न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा था कि वह उच्च न्यायालय जाने के लिए स्वतंत्र है. Also Read - दिल्ली के खिलाफ क्वालिफायर से पहले बोले MS Dhoni- खिलाड़ियों ने सभी विभागों को संतुलन में रखने की जिम्मेदारी ली

हालांकि यह मामला सुनवाई के लिए जब आया तो न्यायमूर्ति वैद्यनाथन ने कहा कि कई लोगों ने दावा किया कि वे जयललिता के कानूनी उत्तराधिकारी हैं. अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि इस मामले पर अंतिम फैसले के लिए डीएनए परीक्षण का आदेश दिया जा सकता है. अदालत ने कहा कि अगर परीक्षण के बाद दावा झूठा साबित हुआ तो याचिकाकर्ता को इसके नतीजों का सामना भी करना पड़ेगा.