कोलकाता: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर के अनुसंधान दल ने नये आंकड़े पेश किये हैं जिसमें इस बात की पुष्टि की गयी है कि अंटार्कटिक में ओजोन का क्षरण कम हो रहा है. Also Read - West Bengal: BJP अध्‍यक्ष JP Nadda ने लॉन्‍च किया 'सोनार बांग्‍ला' अभियान, एक्‍ट्रेस Payel Sarkar ने ज्‍वाइन की भाजपा

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आईआईटी, खड़गपुर द्वारा शुक्रवार को जारी बयान में संस्थान के समुद्र, नदी, वातावरण और विधि विज्ञान केंद्र (कोरल) के अनुसंधानकर्ताओं ने 1979 से 2017 तक के आंकड़े एकत्रित किये हैं जो दिखाते हैं कि 1987 से अंटार्कटिक के ऊपर ओजोन परत का क्षरण हो रहा था, लेकिन 2001 से 2017 के बीच 12 से 21 किलोमीटर की पट्टी में यह क्षरण काफी कम हो गया. बयान में कहा गया कि दुनिया में जहां जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग पर बहस हो रही है, ऐसे में कोरल के अनुसंधानकर्ताओं के निष्कर्षों से पर्यावरणविदों को थोड़ा उत्साहित होने का मौका मिला है. Also Read - Explainer | Petrol price hike: जानिए- क्यों आसमान छूते जा रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

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अंटार्कटिक में ओजोन के क्षरण का विस्तृत और दीर्घकालिक विश्लेषण करने वाला पहला शोध

इसमें कहा गया कि यह अपनी तरह का पहला अनुसंधान है जो अंटार्कटिक में ओजोन के क्षरण का विस्तृत और दीर्घकालिक विश्लेषण करता है. प्रोफेसर जयनारायण कुट्टीपूरथ ने कहा कि हमने पिछले चार दशकों में देखा है कि हर साल सर्दियों में ओजोन परत का क्षरण चरम पर होता है. केवल 1988 और 2002 की सर्दियों में ऐसा नहीं हुआ था. हालांकि हमारा विश्लेषण 2001 से 2017 की अवधि में ओजोन क्षरण में स्पष्ट कमी दर्शाता है. उन्होंने कहा कि यह ओजोन परत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है. (इनपुट एजेंसी)