नई दिल्ली. दिल्ली में शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी की सरकार के विरोध से राजनीति के मैदान में उतरने वाले आम आदमी पार्टी के नेता व सीएम अरविंद केजरीवाल अब कांग्रेस-जेडीएस की कर्नाटक में बनने वाली सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे. वह जेडीएस नेता और कर्नाटक के मुख्यमंत्री के लिए नामित एच.डी. कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस और अन्य नेताओं के साथ मंच साझा करते नजर आएंगे. केजरीवाल के एक करीबी ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस के संरक्षक एच.डी. देवगौड़ा ने केजरीवाल को आमंत्रित किया है. उन्होंने बताया कि इससे संबंधित कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है. अरविंद केजरीवाल के अलावा दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के भी कुमारस्वामी के सीएम पद के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने की खबर है. कुमारस्वामी 23 मई को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. बता दें कि कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस को 78 सीटें मिली हैं. बताया जा रहा है कि 33 कैबिनेट मंत्रियों की टीम में उसके 20 मंत्री हो सकते हैं. वहीं, दूसरी तरफ 37 विधायकों वाले जेडीएस सीएम के अतिरिक्त 12 मंत्री बना सकता है.

शपथग्रहण में चंद्रबाबू नायडू के भी आने की संभावना
इधर, बुधवार को मुख्यमंत्री पद पर एच. डी. कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री तथा तेलुगु देशम पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के भी हिस्सा लेने की संभावना है. तेदेपा की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि नायडु के कैबिनेट के सहयोगियों ने उन्हें सलाह दिया है कि उन्हें इस शपथग्रहण समारोह में शिरकत करना चाहिए क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौडा के साथ उनकी नजदीकी है. इसमें कहा गया है कि उन्होंने अपने मंत्रियों से इस बारे में चर्चा की थी और बताया कि कुमारस्वामी ने उन्हें इस समारोह में शामिल होने के लिए बुलाया है.

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सत्ता साझा करने की बातों को कुमारस्वामी ने खारिज किया
कर्नाटक के होने वाले सीएम जेडीएस नेता कुमारस्वामी ने प्रदेश में सत्ता बनाने से पहले सहयोगी दल कांग्रेस के साथ सत्ता साझा करने की अटकलों को खारिज कर दिया. मीडिया में ऐसी खबरें आई थी कि कांग्रेस और जेडीएस कर्नाटक में 30-30 महीनों के लिए सत्ता-साझेदारी का समीकरण बना रहे हैं. कुमारस्वामी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस तरह की कोई बात नहीं हुई है. आपको बता दें कि इससे पहले वर्ष 2006 में जेडीएस और भाजपा ने सत्ता में 20-20 महीने की साझेदारी का समझौता कर कर्नाटक में सरकार बनाई थी. लेकिन जब सरकार का नेतृत्व करने के लिए भाजपा की बारी आई तो कुमारस्वामी समझौते से मुकर गए और बीएस येदियुरप्पा को सत्ता सौंपने से इनकार कर दिया. नतीजा यह निकला कि सरकार गिर गई. इसके बाद 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने दम पर सरकार बनाई और येदियुरप्पा दक्षिण में भगवा पार्टी की पहली सरकार के मुख्यमंत्री बने.

(इनपुट-आईएएनएस)