नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में बीजेपी की ओर से सर्मथन वापस लेने के बाद राज्य में महबूबा मुफ्ती की सरकार गिर गई थी. इसके बाद राज्यपाल शासन लग गया था. हालांकि विधानसभा को भंग करने की जगह इसे सस्पेंड रखा गया है. सरकार गिरने के बाद पीडीपी के कई विधायकों ने बागी तेवर दिखाए और महबूबा की जमकर आलोचना की. अब इन्हीं बागी विधायकों के भरोसे बीजेपी राज्य में एक बार फिर सरकार बनाने का सपना देख रही है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक सरकार बनाने के लिए बीजेपी और सज्जाद लोन की पीपुल्स कॉन्फ्रैंस और पीडीपी के बागियों के बीच बातचीत चल रही है.

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बीजेपी किसी भी मांग को पूरा करने या कोई भी मंत्रालय देने के लिए तैयार है, लेकिन वो मुख्यमंत्री के पद पर किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहती. पार्टी को लग रहा है कि पहली बार बीजेपी को राज्य में सीएम पद मिल सकता है और वह इसे किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहती है.

सीएम पद पर फंसा पेंच
पिछले सप्ताह दिल्ली में बीजेपी नेताओं के साथ बैठक करने वाले पीडीपी बागी कैंप के एक सूत्र ने बताया कि वो भी मुख्यमंत्री के पद पर समझौता नहीं करेंगे. भविष्य में बीजेपी का मुख्यमंत्री बन सकता है, लेकिन अभी ऐसा करने के लिए उचित समय नहीं है. बीजेपी की तरफ से जम्मू क्षेत्र के वरिष्ठ नेता जितेंद्र सिंह का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए लिया जा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सज्जाद लोन को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है. सज्जाद बीजेपी के सहयोगी हैं.

पीपुल्स कॉन्फ्रैंस चुप
सूत्रों के अनुसार पीपुल्स कॉन्फ्रैंस ने अलग से कोई राय नहीं रखी है और एक तरह से उनकी तरफ से पीडीपी के बागी विधायक ही पैरोकारी कर रहे हैं. राज्य में पीपुल्स कॉन्फ्रैंस के दो विधायक हैं. इस बारे में जब सज्जाद लोन से संपर्क किया गया तो उन्होंने कोई कमेंट करने से इनकार कर दिया. पीडीपी की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा है, ‘यदि दिल्ली हस्तक्षेप करती है और हमारी पार्टी को तोड़ती है और सज्जाद लोन या किसी को भी मुख्यमंत्री बनाती है, तो फिर कश्मीरियों का भारतीय लोकतंत्र पर भरोसा उठ जाएगा. दिल्ली के किसी हस्तक्षेप को गंभीरता से लिया जाएगा.

बीजेपी कर चुकी है सरकार बनाने से इनकार
इसके बाद बीजेपी महासचिव राममाधव ने ट्वीट किया था कि पार्टी राज्य में सरकार बनाने की कोशिश नहीं कर रही है और बीजेपी राज्य में शांति और विकास को देखते हुए राष्ट्रपति शासन के पक्ष में है. लेकिन एक वरिष्ठ पीडीपी नेता ने माना है कि पार्टी के 28 में से 21 विधायक अलग होकर बीजेपी के साथ जाने को तैयार हैं, लेकिन इसके लिए बीजेपी को ये वादा करना होगा कि नई बनने वाली सरकार ढाई साल तक बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि ‘विधायकों के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं. उन्हें पता है कि लोग उनसे नाराज हैं और आतंकवादी उन्हें मारने के लिए तैयार बैठे हैं. उनके लिए ये जिंदगी और मौत का सवाल है. ऐसे में वो नई दिल्ली को नाराज नहीं कर सकते हैं.

21 विधायक महबूबा के साथ
दूसरी ओर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के कम से कम 21 विधायक रविवार को पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती से मिल कर उनके प्रति अपना समर्थन प्रकट कर चुके हैं. पार्टी सूत्रों के अनुसार महबूबा के दिल्ली से लौटने के शीघ्र बाद ये विधायक उनसे मिले. अबतक कम से कम 21 विधायक महबूबा मुफ्ती से मिल कर उनके नेतृत्व के प्रति अपना समर्थन प्रकट कर चुके हैं. पिछले हफ्ते विधायकों समेत कई पार्टी नेताओं ने उनके विरुद्ध बगावत का झंडा उठाया था. सूत्रों ने बताया कि उनमें एक नाराज विधायक भी थे और उन्हें समझाने – बुझाने का प्रयास चल रहा है. सूत्रों के अनुसार अन्य विधायकों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश की जा रही है क्योंकि उनमें से ज्यादातर शहर से बाहर हैं.