लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने आज के अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं. आज वह सिर्फ अधिकारियों से ही मुलाकात करेंगे. ये खबर समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से आई है. हालांकि इसके पीछे कोई वजह नहीं बताई गई है. बीजेपी को गोरखपुर सीट पर हुए उपचुनाव में सपा के हाथों करारी हार मिली है. 29 साल में पहली बार बीजेपी ने यहां सीट गंवाई है. इसके अलावा पार्टी ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की फूलपुर सीट भी गंवा दी. इस हार के बाद अब बीजेपी मंथन में जुटी हुई है.Also Read - फैजाबाद रेलवे जंक्शन को अब 'अयोध्या कैंट' कहा जाएगा, यूपी सरकार ने बदला नाम

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सपा ने केंद्र और उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ बीजेपी को करारा झटका देते हुए गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में जीत हासिल की है. इन परिणामों ने बीजेपी को इस गठजोड़ के खिलाफ नए सिरे से रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है. गोरखपुर सीट पर सपा के प्रवीण निषाद ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के उपेंद्र दत्त शुक्ला को 21 हजार 881 मतों से हराया. निषाद को चार लाख 56 हजार 513 वोट मिले जबकि बीजेपी उम्मीदवार को चार लाख 34 हजार 632 वोट मिले. Also Read - सपा सरकार में आतंकियों की आरती उतारी जाती थी, हिंदुओं पर झूठे मुकदमे होते थे: सीएम योगी

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वहीं, फूलपुर लोकसभा सीट पर सपा के नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के कौशलेंद्र सिंह पटेल को 59 हजार 460 वोटों से हराया. इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी अतीक अहमद 48 हजार 94 मत पाकर तीसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी मनीष मिश्र को मात्र 19 हजार 353 मत मिले.

योगी ने बताई हार की वजह

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा और बसपा के मेल को बेमेल सौदेबाजी बताते हुए अपनी पार्टी के अति आत्मविश्वास को गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी के खराब प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार बताया और कहा कि पार्टी नतीजों की समीक्षा करेगी. सीएम योगी ने कहाकि जब इन दोनों सीटों के उपचुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित हुए थे, तब सपा, बसपा और कांग्रेस समेत सभी अलग-अलग थे. लेकिन चुनाव के बीच में सपा-बसपा के बीच जो आपसी सौदेबाजी और बेमेल गठबंधन हुआ उसको समझने में कहीं ना कहीं कमी रही और अति आत्मविश्वास उसका कारण है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि उपचुनाव के नतीजे जनता का फैसला है, लोकतंत्र में जनता जनार्दन के रूप में है. हम उसके फैसले को स्वीकार करते हैं. उपचुनाव में स्थानीय मुद्दे हावी होते हैं. आम चुनाव जब होंगे तो उसमें राष्ट्रीय मुद्दे होंगे. देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले चार सालों में जो कार्य हुए हैं, उनसे देश में एक विश्वास जगा है.