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नई दिल्ली, 23 नवंबर| कोल इंडिया (सीआईएल) में कार्यरत श्रमिकों के अधिकांश संगठनों ने कंपनी की हिस्सेदारी बेचे जाने और रद्द कर दिए गए कोयला ब्लॉकों की इंटरनेट के जरिए नीलामी के विरोध में सोमवार से प्रस्तावित अपनी हड़ताल स्थगित कर दी है। श्रमिक संगठनों के नेताओं ने शनिवार को कोयला मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक बैठक की, जिसके बाद इंडियन नेशनल माइनवर्कर्स फेडरेशन के महासचिव एस. क्यू. जमा ने कहा कि कोयला मंत्री पीयूष गोयल के साथ होने वाली बैठक के मद्देनजर हड़ताल स्थगित कर दी गई है। Also Read - खुशखबरी: साल 2020 में इस बड़ी सरकारी कंपनी में निकलेंगी 10 हजार नई नौकरियां

गोयल और श्रमिक संगठनों के नेताओं के बीच हालांकि इस बैठक की तिथि निर्धारित नहीं हो सकी। जमा ने कहा कि श्रमिक संगठन हर उस फैसले का विरोध करना जारी रखेंगे जिससे कोल इंडिया की स्थिति कमजोर हो सकती है। जमा ने कहा कि निजी क्षेत्र की कंपनियों से प्रतिद्वंद्विता कोल इंडिया को कमजोर कर सकती है, जिससे कोल इंडिया के 370,000 कामगारों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। Also Read - Cancelled coal mines allotted to Coal India

उन्होंने कहा, “संसद में अपनी मजबूत स्थिति के बल पर सरकार हमें धराशायी करने की कोशिश कर सकती है, लेकिन हम अपनी पूरी शक्ति से विरोध करना जारी रखेंगे।” श्रमिक संगठन, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (ऐटक) ने कहा है कि इस कोयला अध्यादेश का इस्तेमाल पूरे कोयला उद्योग के निजीकरण के लिए किया जा सकता है।

ऐटक के महासचिव गुरुदास दासगुप्ता ने कहा है कि अगर इस प्रचुर राष्ट्रीय संसाधन का नीजिकरण कर दिया गया तो राष्ट्रीय हित खतरे में पड़ जाएगा और कोल इंडिया कमजोर हो जाएगी। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) ने कोयला राष्ट्रीयकरण अधिनियम को निष्प्रभावी बनाने के किसी भी फैसले की निंदा की और कोयला ब्लॉकों को इंटरनेट के जरिए नीलामी कर फिर से आवंटित करने के सरकार के फैसले पर कहा, “यह किसी भी तरह स्वागत योग्य फैसला नहीं है।”