नई दिल्ली. नौ साल जेल में रहने और अग्रिम जमानत मिलने के कुछ ही समय बाद वर्ष 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले के आरोपी लेफ्टीनेंट श्रीकांत प्रसाद पुरोहित आज मुंबई में अपनी यूनिट गये. सेना के सूत्रों ने बताया कि पुरोहित ने सेना की मुंबई स्थित दक्षिणी कमान की लाइजीनिंग यूनिट से संपर्क किया. वह फिलहाल शहर के एक सैन्य प्रतिष्ठान में रूके हैं.

उन्होंने कहा कि खुफिया कोर के अधिकारी पुरोहित के पुणे स्थित उनकी यूनिट में जाने की संभावना है. वह 2008 में मालेगांव विस्फोट मामले में गिरफ्तारी के पहले इसी यूनिट में काम कर रहे थे. पुरोहित को समीपवर्ती नवी मुंबई की तलोजा जेल से रिहा किया गया. दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें यह कहते हुए जमानत दी थी कि मामले की जांच कर रही विभिन्न एजेंसियों द्वारा दाखिल आरोपपत्रों में परस्पर विरोधाभास है.

सूत्रों ने कहा कि सेना मुख्यालय सेवा से उनके निलंबन के बारे में अदालत के आदेश का अध्ययन करने के बाद ही समीक्षा करेगा.
अपनी यूनिट में रहने के दौरान पुरोहित के ऊपर तमाम प्रतिबंध रहेंगे जिसमें उनके यूनिट के भीतर आवाजाही पर भी प्रतिबंध शामिल हैं. सूत्रों ने कहा कि सेना मुख्यालय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अध्ययन करेगा और उसके निष्कर्षों के अनुरूप यह तय करेगा कि क्या पुरोहित के सेवा से निलंबन के फैसले को वापस लिया जा सकता है.

जेल से बाहर आने के बाद पुरोहित को मुहैया करायी गयी सुरक्षा के बारे में उन्होंने कहा कि उनके समक्ष सुरक्षा के खतरों को देखते हुए उन्हें सुरक्षा मुहैया करायी गयी. सूत्रों ने बताया कि कोर्ट आफ इंक्वायरी की रिपोर्ट के बाद पुरोहित का वेतन एवं भत्तों को उनकी कुल तनख्वाह के 25 प्रतिशत पर सीमित कर दिया गया था. बाद में सशस्त्र बल न्यायाधिकरण के निर्देश के बाद इसे बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया.

उल्लेखनीय है कि 29 सितंबर 2008 में मालेगांव में हुए विस्फोटों में छह लोग मारे गये थे. सुप्रीम कोर्ट ने पुरोहित को जमानत नहीं देने के बंबई उच्च न्यायालय के 25 अप्रैल के निर्णय को खारिज कर दिया. सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें कुछ पाबंदिया लगाते हुए जमानत दी.