मालेगांव बम धमाके के आरोपी कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित ने आज जेल से रिहा होने के बाद पहली सेना की वर्दी पहनी. कर्नल पुरोहित को हाल ही में 2008 मालेगांव धमाके में करीब 9 साल बाद जमानत मिली थी. एनआई ने उनकी जमानत का विरोध किया था.

सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद कर्नल पुरोहित 23 अगस्त को तलोजा जेल से रिहा हुए थे. पुरोहित की रिहाई के बाद उन्हें लेने के लिए सेना की गाड़ी पहुंची थी. सेना के अधिकारी और जवानों ने पुरोहित को एस्कॉर्ट किया. रिहाई के बाद भी पुरोहित सेना के ओपन अरेस्ट में हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि मालेगांव विस्फोट मामले में अभी उनपर से आरोप नहीं हटा है.

पुरोहित सेना की वर्दी तो पहन सकेंगे लेकिन उन्हें स्थायी नियुक्ति अभी नहीं मिलेगी. वो अभी सस्पेंशन पर ही रहेंगे. साल 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में अपनी कथित भूमिका के लिए पिछले लगभग 9 साल से जेल में बंद पुरोहित को सुप्रीम कोर्ट ने 21 अगस्त को जमानत दी थी. 29 सितम्बर 2008 को मालेगांव में हुए बम विस्फोट में 6 लोगों की मौत हुई थी.

सेना में फिर शामिल होने की चाहत

मालेगांव विस्फोट मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के एक दिन बाद लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित ने कहा कि वह जल्द से जल्द सेना में फिर से शामिल होना चाहते हैं. रिहा होने के बाद पुरोहित ने कहा था, ‘मैं अपनी वर्दी पहनना चाहता हूं. यह मेरी त्वचा की ऊपरी परत है. देश के सर्वश्रेष्ठ संगठन भारतीय सेना की सेवा में फिर से जुड़ने पर मैं बहुत खुश हूं.  मेरे दो परिवार हैं- सेना और मेरा परिवार जिसमें मेरी पत्नी,मेरे दो बेटे,बहन और मां हैं. मैं उनसे मिलने के लिए बेताब हूं. सेना ने मेरी इज्जत कम नहीं होने दी. सेना की यह परम्परा और प्रकृति रही है कि वह अपने लोगों की इज्जत कम नहीं होने देती. मैंने यह एक बार भी महसूस नहीं किया कि मैं सेना से बाहर हो जाउंगा.