पत्नी के खाना बनाने को लेकर ताने मारना 'क्रूरता' नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पति के रिश्तेदारों के खिलाफ दर्ज FIR की रद्द

Legal News: पत्नी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसके पति के भाई उसे ये कहकर ताना मारते थे और अपमानित करते थे कि उसे खाना बनाना नहीं आता और उसके माता-पिता ने उसे कुछ नहीं सिखाया.

Published date india.com Published: January 15, 2024 9:48 AM IST
पत्नी के खाना बनाने को लेकर ताने मारना 'क्रूरता' नहीं: हाईकोर्ट (Photo File)
पत्नी के खाना बनाने को लेकर ताने मारना 'क्रूरता' नहीं: हाईकोर्ट (Photo File)

Legal News: पत्नी के खाना के बनाने पर टिप्पणी करना IPC के सेक्शन 498A के तहत क्रूरता नहीं है. ये कहना है बॉम्बे हाईकोर्ट का. दरअसल, पति के रिश्तेदार पत्नी को ताने मारते कि वो ठीक से खाना बनाने नहीं जानती. इसके खिलाफ महिला ने पति के रिश्तेदारों के खिलाफ FIR कर दिया. और कहा कि ये IPC के सेक्शन 498A के तहत क्रूरता है. हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने का आदेश दिया.

पत्नी ने क्या आरोप लगाया?

पत्नी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसके पति के भाई उसे ये कहकर ताना मारते थे और अपमानित करते थे कि उसे खाना बनाना नहीं आता और उसके माता-पिता ने उसे कुछ नहीं सिखाया.

महिला की शिकायत में कहा गया है कि उसकी शादी 13 जुलाई, 2020 को हुई थी. उसने दावा किया कि उसे नवंबर 2020 में उसे ससुराल से बाहर निकाल दिया गया था, जिसके बाद उसने 9 जनवरी, 2021 को एफआईआर दर्ज कराई.

उसने दावा किया कि उसका पति उसकी शादी की तारीख से उसके साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करने में असमर्थ है.

आरोपी ने एफआईआर रद्द करने के लिए कोर्ट का रुख किया.

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हाईकोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई और जस्टिस एनआर बोरकर की डिवीजन बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी. बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, सबूतों को देखा और कहा कि पत्नी को खाना बनाने नहीं आता जैसी टिप्पणियां धारा 498ए के तहत क्रूरता नहीं हैं.

आगे कहा,

“मामले में,इन याचिकाकर्ताओं के खिलाफ लगाया गया एकमात्र आरोप ये है कि उन्होंने टिप्पणी की थी कि महिला खाना बनाना नहीं जानती. ऐसी टिप्पणी IPC की धारा 498A के तहत’क्रूरता’ नहीं है.”

कोर्ट ने कहा कि आईपीसी की धारा 498ए के तहत छोटे-मोटे झगड़े क्रूरता नहीं माने जाते. धारा 498ए के तहत अपराध साबित करने के लिए ये स्थापित करना होगा कि महिला के साथ लगातार क्रूरता की गई.

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने रिश्तेदारों की याचिका स्वीकार कर ली और FIR रद्द करने का आदेश दिया.

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