LPG Price Hike: सुबह-सुबह महंगाई का झटका! गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी, जानें नए रेट

Written By: Gaurav Barar Updated by: Gaurav Barar
Published Date:April 1, 2026 7:07 AM IST

LPG Cylinder Price Hike: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी का असर अब भारतीय रसोई और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर दिखने लगा है.

Commercial Gas Cylinder Price Hike: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग का असर भारत में भी तेजी से दिखने लगा है. आज यानी बुधवार (1 अप्रैल 2026) को नए वित्त वर्ष की शुरुआत हो गई है, लेकिन आम आदमी और कारोबारियों को सुबह-सुबह महंगाई का झटका लगा है. आज कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई है.

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तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 195.50 रुपये का इजाफा कर दिया है. यह लगातार दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है, क्योंकि इससे पहले 1 मार्च 2026 को भी कीमतों में 114.5 रुपये की वृद्धि की गई थी.

होटल और रेस्टोरेंट का बजट बिगड़ेगा

कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने का सीधा असर बाहर खाना खाने पर पड़ सकता है. होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा मालिकों के लिए अब खाना बनाना महंगा हो जाएगा, जिसका बोझ आखिर में आपकी थाली पर ही आएगा.

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से भारत में एनर्जी सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है. हालात ऐसे हैं कि प्रशासन ने घरों में इस्तेमाल होने वाली गैस को प्राथमिकता दी है, जिसके चलते कमर्शियल प्रतिष्ठानों को मिलने वाली सप्लाई में फिलहाल कटौती भी की जा रही है.

शहर नई कीमत (रुपये में)
दिल्ली ₹2078.50
कोलकाता ₹2208.00
मुंबई ₹2031.00
चेन्नई ₹2246.50

घरेलू रसोई गैस में राहत

एक राहत की बात यह है कि घर में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसकी कीमत आखिरी बार 7 मार्च को 60 रुपये बढ़ाई गई थी. दिल्ली में फिलहाल घरेलू सिलेंडर 913 रुपये का मिल रहा है.

पेट्रोल-डीजल जस के तस

इसी तरह, पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी स्थिर बनी हुई हैं. पिछले साल मार्च में 2 रुपये की कटौती के बाद से तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. दिल्ली में पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है.

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

इस महंगाई के पीछे सबसे बड़ा कारण है पश्चिम एशिया का गहराता संकट. दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 50 प्रतिशत तक उछल गई हैं. इसकी शुरुआत तब हुई जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के एक संयुक्त हमले में ईरान के 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई.

इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की. ईरान ने मिसाइलों और ड्रोनों से खाड़ी देशों (यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन) में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों, दूतावासों और ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाया है.

होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट

दुनिया के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधा है. यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. युद्ध की वजह से इस रास्ते से होने वाली शिपिंग बाधित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अफरा-तफरी का माहौल है.

भारत अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है. जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं या सप्लाई चैन में दिक्कत आती है, तो भारतीय तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को कमर्शियल गैस और हवाई ईंधन के दाम बढ़ा देती हैं.

आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में ऊर्जा की कीमतें और बढ़ सकती हैं. इसका असर न केवल ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए भी यह एक बड़ा खतरा बना हुआ है.

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