Kisan Andolan: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नए कृषि कानूनों के लागू किये जाने पर रोक लगा दी है. इसके साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय ने इन कानूनों पर चर्चा के लिए एक समिति का भी गठन किया है. कमेटी में कुल 4 लोग शामिल हैं. यह कमेटी मामले की मध्यस्थता नहीं, बल्कि समाधान निकालने की कोशिश करेगी.Also Read - SC on Dharam Sansad: धर्म संसद में दिए गए नफरत भरे भाषणों के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से मांगा जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी से दो महीने में रिपोर्ट सौंपने को कहा है. शीर्ष अदालत ने कहा कि समिति, सरकार के साथ-साथ किसान संगठनों और अन्य हितधारकों के प्रतिनिधियों को सुनने के बाद एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहली बैठक आज से 10 दिनों के भीतर की जाएगी और 2 महीने में रिपोर्ट सौंपनी होगी. Also Read - Supreme Court का अहम फैसला, कहा- मकान बनाने के लिए पैसे मांगना भी 'दहेज' मांगने की तरह


कोर्ट ने इन्हें सौंपी किसानों की समस्या सुलझाने की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई इस समिति में कृषि अर्थशास्त्री एवं कृषि मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कृषि लागत और मूल्य आयोग के पूर्व अध्यक्ष अशोक गुलाटी, कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार जोशी के अलावा दो किसान नेता भी शामिल हैं. हालांकि, ये दोनों नेता उन किसान संगठनों के नहीं हैं, जो देश की राजधानी की सीमाओं पर किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं.

समिति में शामिल किसान नेताओं में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सदस्य भूपिंदर सिंह मान और महाराष्ट्र के किसान संगठन शेतकरी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट शामिल हैं. पद्म अलंकरण से सम्मानित अशोक गुलाटी जानेमाने कृषि अर्थशास्त्री हैं. वह कृषि लागत और मूल्य आयोग के अध्यक्ष के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं.

वहीं, डॉ. जोशी कृषि अनुसंधान के क्षेत्र के जाने-पहचाने नाम हैं. वह कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी के निदेशक रहे हैं. समिति में शामिल दो किसान नेताओं और कृषि क्षेत्र के जानकारों में भूपिंदर सिंह मान और अनिल घनवट कृषि सुधारों के पक्षधर रहे हैं.

किसानों ने जताई नाराजगी
किसान नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर असंतुष्टि जाहिर की है. किसान नेताओं ने कहा कि इस कमेटी के तीन सदस्य तो पहले कृषि कानूनों और खुले बाज़ार के पक्ष में हैं. ये सदस्य पहले भी कृषि कानूनों के पक्ष में बयान देते रहे हैं. किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कहा कि देश का किसान सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के इस फैसले से निराश है.

टिकैट ने किया यह ट्वीट
राकेश टिकैत ने ट्वीट कर कहा, ‘माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित कमेटी के सभी सदस्य खुली बाजार व्यवस्था या कानून के समर्थक रहे हैं. अशोक गुलाटी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने ही इन कानून को लाये जाने की सिफारिश की थी. देश का किसान इस फैसले से निराश है.’