प्रयागराज: साल 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को मुआवजा नहीं दिए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र और राज्य सरकार से एक महीने के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा. न्यायमूर्ति भारती सप्रू और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की पीठ ने पीलीभीत के प्यारा सिंह और बरेली के हरपाल सिंह द्वारा दायर रिट याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया. Also Read - COVID-19: पीएम मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों को बांटे राज्य, हर दिन देंगे कोरोना पर रिपोर्ट

बता दें कि 31 अक्‍टूबर 1984 तत्‍तकालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्‍या उनके सुरक्षा गार्डों ने कर दी थी. ये गार्ड सिख समाज से थे, जिसके बाद देश के कई हिस्‍सों में दंगे हुए और हजारों निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया था. Also Read - SC ने AGR बकाये का स्व-मूल्यांकन करने पर केंद्र और टेलिकॉम कंपनियों को लगाई फटकार

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि 1984 के दंगों में प्यारा सिंह की पत्नी और बेटी एवं हरपाल सिंह के पिता की नृशंस हत्या कर दी गई थी. इस संबंध में प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी और प्रत्येक मृतक के लिए 20,000 रुपए का अंतरिम मुआवजा दिया गया. हालांकि, सरकार द्वारा पुनर्वास नीति के तहत घोषित अंतिम मुआवजे का अभी तक भुगतान नहीं किया गया है. Also Read - जामिया हिंसा की जांच संबंधी याचिका पर दिल्‍ली हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

याचिकाकर्ताओं के वकील दिनेश राय ने कहा कि केंद्र सरकार जनवरी, 2006 में पुनर्वास नीति लेकर आई, जिसके तहत मृतक व्यक्ति के आश्रित को 3.5 लाख रुपए और घायलों को 1.25 लाख रुपए मुआवजा दिए जाने का निर्णय किया गया.

फरवरी, 2015 में इस मुआवजे की राशि बढ़ाकर 8.5 लाख रुपए कर दी गई. अदालत को बताया गया कि करीब 34 साल बीत गए हैं, लेकिन इन याचिकाकर्ताओं को अभी तक अंतिम मुआवजा नहीं दिया गया है. इस मामले की सुनवाई एक माह बाद की जाएगी.