
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Opposition On One Nation One Election: पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के एक साथ चुनाव कराने पर गुरुवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी. एक बयान में कहा गया है कि समिति ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 18,626 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी.
बयान में कहा गया है कि यह रिपोर्ट दो सितंबर 2023 को समिति गठन के बाद से हितधारकों, विशेषज्ञों के साथ व्यापक परामर्श और 191 दिनों के शोध कार्य के बाद तैयार की गई है. समिति ने कहा है कि पहले चरण में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं, जिसके बाद 100 दिन के अंदर दूसरे चरण में स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जा सकते हैं.
वन नेशन, वन इलेक्शन की रिपोर्ट पर विपक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार का मकसद सिर्फ ‘वन नेशन, नो इलेक्शन’ (एक राष्ट्र, कोई चुनाव नहीं) का है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार संविधान को पूरी तरह से नष्ट करना चाहती है.
जयराम रमेश ने कहा, ‘प्रधानमंत्री का उद्देश्य बहुत स्पष्ट है. वह, स्पष्ट बहुमत, दो-तिहाई बहुमत, 400 सीट की मांग कर रहे हैं. वे बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान को पूरी तरह से नष्ट करना चाहते हैं. सरकार का मकसद ‘एक राष्ट्र, कोई चुनाव नहीं’ है.’
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा, ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव कैसे हो सकता है जब मौजूदा शासन लोगों के जनादेश को स्वीकार नहीं कर रहा है? साथ ही, यह पूरी तरह से पंचायतों और हर चीज के विकेंद्रीकरण की भावना के खिलाफ है. देखते हैं कि सिफारिशें क्या हैं.’
समिति ने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के मुद्दे पर 62 पार्टियों से संपर्क किया था और इस पर जवाब देने वाले 47 राजनीतिक दलों में से 32 ने एक साथ चुनाव कराने के विचार का समर्थन किया, जबकि 15 दलों ने इसका विरोध किया. इस रिपोर्ट के अनुसार, कुल 15 पार्टियों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
राष्ट्रीय दलों में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने देश में एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने इसका समर्थन किया.
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