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नागरिकता कानून और NRC के खिलाफ प्रदर्शनों का आखिर क्या है मकसद, विपक्ष ने ये बात कहकर बताया

शाहीन बाग़ सहित पूरे देश में विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं, विपक्ष ने इसकी वजह बताई है.

Published: February 5, 2020 5:13 PM IST

By India.com Hindi News Desk | Edited by Zeeshan Akhtar

Anti-CAA protests have swept the country over the last one week (Credit: ANI).

नई दिल्ली: दिल्ली के शाहीन बाग (Shaheen Bagh) सहित देश के विभिन्न भागों में सीएए के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों को ‘‘स्वत: स्फूर्त’’ करार देते हुए विपक्ष ने बुधवार को कहा कि इनके माध्यम से सरकार को आगाह किया जा रहा है कि संविधान खतरे में है तथा कई राज्यों की विधानसभा में पारित किये गये प्रस्ताव भी इसी की ओर संकेत करते हैं. हालांकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष के इन आरोपों से इंकार करते हुए दावा किया कि विरोध प्रदर्शन की आड़ में महिलाओं और बच्चों को ‘‘बहकाया’’ जा रहा है तथा देश अपने तानबाने से छेड़छाड़ करने वालों को कभी माफ नहीं करेगा.

राज्यसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यावाद प्रस्ताव पर चल रही चर्चा में भाग लेते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Nationalist Congress Party) के माजिद मेमन ने कहा कि अभिभाषण में देश की जमीनी सच्चाई प्रतिबिंबित होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का चुनावी घोषणापत्र नहीं होना चाहिए तथा इसमें सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा होना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘आज देश में आए दिन लोग संविधान की उद्देशिका को इसलिए पढ़ रहे हैं ताकि सरकार को इस बात के लिए आगाह किया जा सके. ’’ उन्होंने कहा ‘‘सरकार को इस बात पर विचार करना चाहिए कि आज देश के विभिन्न हिस्सों में इतने आंदोलन क्यों हो रहे हैं? लोग खुले आसमान के नीचे क्यों बैठ रहे हैं? महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ सर्दी के बावजूद धरने पर बैठी हैं.’’

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राकांपा नेता ने कहा कि एक बच्चे की ठंड के कारण मौत हो गयी क्योंकि उसकी मां बाहर धरने पर बैठी थी. उन्होंने दावा कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) आदि का जो लोग विरोध कर रहे हैं, उनमें अधिक संख्या गैर मुस्लिमों की है. उन्होंने दावा किया कि देश की एक बहुत बड़ी आबादी इसके विरूद्ध है. मेनन ने अभिभाषण में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने की सराहना किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसकी सराहना नहीं की जा सकती. राकांपा नेता ने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला संसद में श्रीनगर सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि उन्हें किस कारण से जन सुरक्षा कानून के तहत नजरबंद किया गया, जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने सवाल किया कि अब्दुल्ला को संसद सत्र में भाग लेने और श्रीनगर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने क्यों नहीं दिया जा रहा है?

राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने राजधानी के शाहीन बाग में सीएए, एनआरसी के खिलाफ चल रहे धरने का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘वहां की महिलाओं ने अपने आंचल को परचम बना दिया है.’’ उन्होंने इस पूरे आंदोलन को ‘‘स्वत: स्फूर्त’ करार देते हुए कहा कि विपक्षी दलों में इतनी सामर्थ्य नहीं है कि वह देश में इतने बड़े पैमाने पर आंदोलन चला सके. उन्होंने सत्ता पक्ष की सीटों की ओर संकेत करते हुए कहा कि विपक्षी दलों में यदि ऐसी सामर्थ्य होती तो वे वहां (सत्ता पक्ष) में बैठे होते.

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राजद सदस्य ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद वहां के लोगों पर तमाम पाबंदियों, तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को नजरबंद किए जाने का जिक्र करते हुए सवाल पूछा कि वहां किससे पूछ कर सरकार यह दावा कर रही है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद राज्य के लोग खुश हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को अब जाकर चिनार के वृक्षों से पूछना चाहिए कि क्या वे खुश हैं? झा ने भी कहा कि फारूक अब्दुल्ला को नजरबंदी से रिहा किया जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को जो जनादेश मिला है, उसके कारण वह ‘‘धमकी की जुबान बोल रही है.’’ उन्होंने सरकार को आगाह किया उसे चुनाव में मिले बहुमत का गुमान नहीं करना चाहिए क्योंकि ‘‘जब देश ही हार जाएगा तो आप चुनाव जीतकर क्या कर लेंगे?’’

राजद सदस्य ने कहा कि जो सरकार ‘‘सहकारी संघवाद’’ का दावा करती है लेकिन उसके शासनकाल में देश की पांच-छह विधानसभाएं संसद द्वारा पारित कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित करती हैं. उन्होंने दावा किया कि देश ने ऐसे हालात पहले कभी नहीं देखे. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए दावा किया कि सीएए के विरोध के नाम पर महिलाओं और बच्चों को ‘‘बहकाया जा रहा है.’’ उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उसने नरेन्द्र मोदी सरकार को मिले जनादेश का कभी सम्मान नहीं किया

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