गांधीनगर: गुजरात के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने बुधवार को कहा कि राज्य में 2002 के दंगों पर नानावती आयोग की रिपोर्ट कुछ गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और कांग्रेस द्वारा तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री नरेन्द्र मोदी को बदनाम करने की साजिश को उजागर करती है. जडेजा ने दावा किया कि तीन पूर्व आईपीएस अधिकारियों ने दंगों के लिए गुजरात की मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी.

बीजेपी नेता व मंत्री जडेजा ने राज्य विधानसभा में आयोग की रिपोर्ट को पेश किया. बता दें कि नानावती आयोग ने 2002 के दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को क्लीन चिट दी है.

दुनियाभर में मोदी की छवि खराब के लिए एनजीओ और कांग्रेस की साजिश
सदन में रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद जडेजा ने मीडियाकर्मियों को बताया कि आयोग की रिपोर्ट राज्य में 2002 के दंगों के बारे में लोगों के बीच सभी संदेहों को स्पष्ट करती है. यह दुनियाभर में मोदी की छवि खराब करने के लिए कुछ एनजीओ और कांग्रेस की साजिश को उजागर करती है.

अपने एजेंडे को पूरा करने आरोप लगाए कि दंगे राज्य-प्रायोजित थे
भाजपा नेता ने कहा कि आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि मोदी की छवि खराब करने की कोशिश की गई थी. उन्होंने कहा, ‘कई एनजीओ ने गुजरात, उसके लोगों और नरेन्द्र मोदी (गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री) की छवि धूमिल करने की साजिश रची थी. अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए उन्होंने आरोप लगाए कि दंगे राज्य-प्रायोजित थे.

नानावती आयोग ने सरकार को क्लीन चिट दी है
नानावती आयोग ने 2002 के दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को क्लीन चिट दी है. इन दंगों में 1000 से अधिक लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय के थे. ये दंगे गोधरा रेलवे स्टेशन के समीप साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन की दो बोगियों में आग लगाए जाने के बाद भड़के थे, जिसमें 59 ‘कारसेवक’ मारे गए थे.

मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के वास्ते कड़ी मेहनत की
मंत्री ने कहा कि लेकिन आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठकें कीं, घटनास्थल पर गए और दंगों के दौरान कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के वास्ते कड़ी मेहनत की. उन्होंने कहा कि आयोग उनके (एनजीओ) आरोपों में से किसी पर भी सहमत नहीं था. जडेजा ने कहा कि आयोग ने 2002 दंगों में कथित भूमिका के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी और अन्य को क्लीन चिट दे दी.

आईपीएस अधिकारियों ने सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी
गुजरात के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने दावा किया कि तीन पूर्व आईपीएस अधिकारियों आर बी श्रीकुमार, राहुल शर्मा और संजीव भट्ट ने दंगों के लिए सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा, आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह उनके आरोपों से सहमत नहीं है.

आयोग ने आईपीएस अधिकारियों की नकारात्मक भूमिकाओं का उल्लेख किया
मंत्री ने कहा, आयोग ने उनके द्वारा निभाई गई नकारात्मक भूमिकाओं का उल्लेख किया है. यह स्पष्ट किया है कि वे इन आईपीएस अधिकारियों से सहमत नहीं है. जडेजा ने कहा कि मोदी घटना के बाद गोधरा और उस स्थान पर गए थे, जहां ट्रेन जलाई गई थी. उन्होंने कहा कि वह सबूत नष्ट करने निजी यात्रा पर नहीं गए थे जैसे कि आरोप लगाए गए थे.

 मोदी के आवास पर एक बैठक स्थिति की समीक्षा करने के लिए की गई थी
मंत्री ने आयोग की रिपोर्ट के हवाले से कहा, स्थानीय प्रशासन उनकी यात्रा के बारे में जानता था और गोधरा में अधिकारी भी इसके बारे में जानते थे. जडेजा ने कहा कि दंगों के दौरान मोदी के आवास पर एक बैठक के बारे में आयोग का कहना है कि यह स्थिति की समीक्षा करने के लिए की गई थी.