राज्यसभा चुनाव: MP में कांग्रेस कैंडिडेट मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, जानें कैसे फायदे में रहेगी BJP

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:June 9, 2026 9:37 PM IST

मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उन नेताओं में गिनी जाती हैं, जिनकी संगठन में मजबूत पकड़ है. वे 2009 से 2014 तक मंदसौर लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं.

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी की एकमात्र उम्मीदवार और सीनियर नेता मीनाक्षी नटराजन का नॉमिनेशन रिटर्निंग ऑफिसर ने मंगलवार (9 जून 2026) को रद्द कर दिया. इस फैसले के बाद राज्य में राज्यसभा की तीसरी सीट पर मुकाबले का पूरा समीकरण बदल गया है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राह काफी आसान होती दिखाई दे रही है. कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इस मामले की शिकायत की है. आयोग ने पार्टी को अपनी बात रखने के लिए बुधवार (10 जून 2026) को दोपहर 12 बजे का वक्त दिया है. बता दें कि 12 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर चुनाव 18 जून को होंगे. नतीजे भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे.

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न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नॉमिनेशन इस आधार पर खारिज किया कि उन्होंने इसमें एक पेंडिंग केस की जानकारी छिपाई थी. BJP ने इस मुद्दे को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद चुनाव अधिकारी ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब मांगा. निर्धारित समय तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नटराजन के नॉमिनेशन को तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया.

कब होना है चुनाव?

12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव होगा. मध्य प्रदेश की 3 सीटों पर वोटिंग होगी. यहां से सांसद जॉर्ज कुरियन (BJP), दिग्विजय सिंह (INC), सुमेर सिंह सोलंकी (BJP) 21 जून को रिटायर हो रहे हैं. BJP ने पहले ही 2 उम्मीदवार उतार दिए थे. बाद में तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया गया. दूसरी ओर, कांग्रेस ने पूर्व सांसद और राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था.

मंदसौर लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं नटराजन

मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उन नेताओं में गिनी जाती हैं, जिनकी संगठन में मजबूत पकड़ है. वे 2009 से 2014 तक मंदसौर लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी हैं. फिलहाल पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. राज्यसभा का टिकट देकर कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने का संकेत दिया था.

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मिनाक्षी नटराजन के खिलाफ कौन सा मामला पेंडिंग

मामला हैदराबाद की एक अदालत में पेंडिंग एक केस से जुड़ा बताया जा रहा है. BJP का आरोप था कि नटराजन ने अपने हलफनामे में इस मामले का पूरा ब्योरा नहीं दिया.

कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

इस फैसले के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों की गलत व्याख्या करके कांग्रेस उम्मीदवार को चुनावी मैदान से बाहर किया गया है. पार्टी ने साफ कहा है कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी.

राजनीतिक दबाव में रद्द हुआ नॉमिनेशन

कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि मीनाक्षी नटराजन के लिए जिस मामले का हवाला दिया जा रहा है, उसमें सिर्फ नोटिस जारी हुआ था. इसलिए कानूनी रूप से उसे उस कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता, जिसकी जानकारी उम्मीदवार को अनिवार्य रूप से देनी होती है. पार्टी का दावा है कि नॉमिनेशन रद्द करने का फैसला राजनीतिक दबाव में लिया गया है.

क्या है BJP का तर्क?

वहीं, BJP ने निर्वाचन अधिकारी के फैसले का बचाव किया है. पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है. इसलिए किसी उम्मीदवार ने आवश्यक जानकारी छिपाई है, तो कार्रवाई होना स्वाभाविक है. BJP का दावा है कि चुनाव अधिकारी ने उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह फैसला लिया है.

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BJP को क्या फायदा?

मीनाक्षी नटराजन का नॉमिनेशन रद्द होने से पहले ही राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ गया था. BJP की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारने के बाद कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग की आशंका सताने लगी थी. इसी वजह से पार्टी ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति भी बनाई थी.

अब मीनाक्षी नटराजन के चुनावी मैदान से बाहर होने के बाद मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह बदल गया है. अगर अदालत से कोई राहत नहीं मिलती, तो BJP के तीसरे उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है. ऐसे में यह घटनाक्रम न केवल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका है, बल्कि राज्यसभा में संख्या बल की लड़ाई में BJP के लिए भी महत्वपूर्ण बढ़त साबित हो सकता है.

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