कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विपक्षी दलों कांग्रेस और माकपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को भाजपा की ‘बी’ टीम करार देते हुए बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर विधानसभा में CAA के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने से जानबूझकर बचने का आरोप लगाया. कांग्रेस नेता अब्दुल मन्नान ने विधानसभा के एक दिवसीय सत्र के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सत्तारूढ़ दल ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने की विपक्षी दलों की मांग को ‘मनमाने ढंग’ से ठुकरा दिया.

उन्होंने कहा कि अगर तृणमूल कांग्रेस सीएए और एनआरसी के विरोध को लेकर गंभीर है, तो उसे प्रस्ताव पारित करने से किसने रोका है? ये दर्शाता है कि वह भाजपा की ‘बी’ टीम बन गई है. विधानसभा में विपक्ष के नेता मन्नान ने कहा कि कांग्रेस और माकपा ने सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पेश करने के लिए सभी संसदीय मानदंडों का पालन किया और विधानसभा अध्यक्ष बिमान बंद्योपाध्याय के साथ बातचीत भी की. उन्होंने कहा, ‘लेकिन आज उन्होंने कहा कि इसे पेश नहीं किया जा सकता क्योंकि मुख्यमंत्री ने पिछले साल सितंबर में विधानसभा में इस मामले पर चर्चा की थी. क्या सितंबर में सीएए पारित हो गया था? हमने यह सुझाव भी दिया कि टीएमसी द्वारा प्रस्ताव पेश किया जा सकता है. अतीत में कभी भी किसी भी सत्तारूढ़ दल ने इस तरह विधानसभा का इस्तेमाल नहीं किया.’’

वहीं माकपा नेता सुजान सिंह चक्रवर्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी पोंजी घोटालों में शामिल लोगों को बचाने के लिए केन्द्र सरकार को खुश रखना चाहती है. चक्रवर्ती ने कहा, ‘मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह 13 जनवरी को सीएए के विरोध में नयी दिल्ली में होने वाली विपक्षी दलों की बैठक में शामिल नहीं होंगी. वह भाजपा के विभाजनकारी कानून के खिलाफ हो रही बैठक में शामिल नहीं होना चाहतीं, जिसमें सभी विपक्षी दल शामिल होंगे. बैठक होकर रहेगी, जिसके बाद वह जनता के सामने बेनकाब हो जाएंगी.’ गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने कहा कि वह विश्वविद्यालयों में हिंसा और सीएए के विरोध में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई बैठक का बहिष्कार करेंगी.