नई दिल्लीः वंशवाद के मसले पर सत्ताधारी भाजपा खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निशाने पर रहने वाली कांग्रेस ने आखिरकार मान लिया है कि आजादी के बाद गांधी-नेहरू परिवार से इतर उसके और भी नायक रहे हैं. दरअसल, हाल में संपन्न पार्टी अधिवेशन में पेश प्रस्तावों में पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव को याद किया है. स्वर्गीय राजीव गांधी की हत्या के बाद 1991 में देश की कमान संभालने वाले नरसिम्हाराव को एक ‘मजबूत’ प्रधानमंत्री माना जाता है, लेकिन हाल तक कांग्रेस उनको तवज्जो नहीं देती थी. माना जाता था कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ राव के कटु संबंधों के कारण ऐसा किया गया. Also Read - कांग्रेस PM राहत कोष पर जवाब नहीं दे सकती तो ‘PM केयर्स’ पर सवाल पूछने का अधिकार नहीं: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

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दिल्ली में संपन्न कांग्रेस अधिवेशन में राजनीतिक, आर्थिक और विदेशी संबंध को लेकर पेश प्रस्तावों में नरसिम्हाराव को गर्मजोशी के साथ याद किया गया है. 1991 में देश की अर्थव्यवस्था को खोलने वाले नरसिम्हाराव को उदारीकरण का श्रेय दिया गया है. इसमें कहा गया है कि राजीव गांधी की हत्या कांग्रेस को एक बड़ी क्षति हुई थी लेकिन पीवी नरसिम्हाराव ने जिम्मेवारी संभाली और उन्होंने देश को संकट से उबारा. उनके द्वारा शुरू किया गया आर्थिक सुधार सही मायने में ऐतिहासिक था. गौरतलब है कि नरसिम्हाराव की सरकार में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे और उन्होंने देश में उदारीकरण की शुरुआत की. Also Read - बिहार चुनाव से पहले पुलिस मुख्यालय का अजीबोगरीब फरमान जारी, मचा सियासी बवाल

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राव के कार्यकाल में ही भारत और इस्राइल के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुआ था

इसी तरह विदेशी संबंध मामले में पेश प्रस्ताव में कहा गया है कि राव ने एक ऐसी विदेश नीति अपनाई जिसने भारत की संप्रभु हितों को बढ़ावा दिया. राव के कार्यकाल में ही भारत और इस्राइल के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुआ था. आज इस्राइल एक अहम सैन्य और कूटनीतिक साझेदार है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी ने वंशवाद को लेकर भाजपा की ओर से लगातार हो रहे हमलों के बाद अपने सभी नेताओं के योगदान को याद किया है. अखबार ने एक सीनियर नेता के हवाले से लिखा है कि एक ही परिवार पर निर्भर रहने की वजह से भाजपा लगातार कांग्रेस पर हमले करती रही है. कांग्रेस इस मुद्दे को अप्रभावी बनाना चाहती है और इसीलिए उसने दिखाया है कि उसके पास तमाम नेताओं की विरासत है. वह केवल एक परिवार से संचालित नहीं होती.

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अधिवेशन में अपने भाषण में भी कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वह 1947 में जैसी कांग्रेस थी वैसी पार्टी बनाना चाहते हैं. जहां कोई भी नेता पार्टी या सरकार को संचालित कर सकता है. कांग्रेस के महान नेताओं की सूची में नरसिम्हाराव को शामिल किए जाने को पार्टी को सोच में आए बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.