नई दिल्ली। कर्नाटक की सियासी जंग में मात खा चुकी कांग्रेस ने अब नए नए दांव खेलना शुरू कर दिया है. कर्नाटक में गवर्नर वजुभाई वाला की ओर से सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने की ओर से न्योता देने से बिफरी कांग्रेस ने गोवा को मुद्दा बनाने का फैसला किया है. गोवा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, लेकिन राज्यपाल ने उसे न्योता न देकर बीजेपी गठबंधन को सरकार बनाने के लिए बुलाया था. Also Read - बेंगलुरु हिंसा में 3 की मौत, 100 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी, CM येदियुरप्पा ने की शांति की अपील

Also Read - दिल्ली और चेन्नई से कनार्टक आने वालों को तीन दिन संस्थागत पृथकवास में रहना होगा

गोवा रवाना हो रहे चेला कुमार Also Read - कर्नाटक में नए रंगरूप वाला लॉकडॉउन4.0, इन 4 राज्‍यों के लोगों की एंट्री पर भी लगा बैन

न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि कांग्रेस की नई रणनीति के तहत गोवा कांग्रेस इनचार्ज चेला कुमार आज गोवा के लिए रवाना हो रहे हैं. वह पार्टी के दूसरे नेताओं के संग राज्यपाल से मिलेंगे और कहेंगे कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाना चाहिए था. अगर जरूरी हुआ तो कांग्रेस अपने विधायकों की परेड राज्यपाल के सामने कराएगी.

कांग्रेस नेता यतीश नाइक ने कहा कि 2017 में हमने गोवा में सबसे ज्यादा 17 सीटें जीती थीं लेकिन राज्यपाल ने बीजेपी को सरकार बनाने के लिए बुलाया जिसकी 13 सीटें थीं. लेकिन कर्नाटक में राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया. हम मांग करते हैं कि राज्यपाल हमें सरकार बनाने का न्योता दें.

वहीं, कांग्रेस की तर्ज पर अब आरजेडी ने भी इसी तरह का सवाल उठाना शुरू कर दिया है. तेजस्वी ने कहा कि कर्नाटक में लोकतंत्र की हत्या के खिलाफ आरजेडी शुक्रवार को एक दिन का धरना देगी. हम बिहार के राज्यपाल से मांग करते हैं कि वह बिहार में सबसे बड़ी पार्टी आरजेडी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें.

मणिपुर-मेघालय का मामला

वहीं , मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता इबोबी सिंह ने भी कहा कि वह सरकार गठन का दावा करने के लिए राज्यपाल से मिलने का समय मांगेंगे. मणिपुर में पिछले साल हुए चुनाव में कांग्रेस को 60 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटें मिली थीं. भाजपा के खाते में 21 सीटें आई थीं. भाजपा ने क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया था. तब राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला ने कांग्रेस के दावे को नजरअंदाज कर भाजपा और क्षेत्रीय दलों के गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था. माकपा प्रमुख सीताराम येचुरी ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपालों ने न तो गोवा में , न मणिपुर में और न ही मेघालय में सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया और केंद्रीय मंत्रियों ने उनके समर्थन में दलीलें दीं.

बीजेपी को मिला न्योता

बता दें कि कर्नाटक के राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दिया जिसके बाद आज बीएस येदियुरप्पा ने सीएम पद की शपथ ली. राज्यपाल ने उन्हें 15 दिन के भीतर बहुमत साबित करने को कहा है. कांग्रेस और जेडीएस ने राज्यपाल के इस फैसले का विरोध किया है और उसके विधायक राजभवन के बाहर धरने पर बैठे हैं. कांग्रेस-जेडीएस कहना है कि राज्यपाल को 117 विधायकों का समर्थन की चिट्ठी सौंपने के बावजूद कुमारस्वामी को न्योता नहीं दिया गया.

क्लर्क की नौकरी करते हुए दक्षिण में RSS के लिए करते थे काम, तीसरी बार बने CM

कर्नाटक की 222 सीटों पर हुए चुनाव में किसी भी सरकार को बहुमत नहीं मिला है. बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है और उसे 104 सीटें मिली हैं जो बहुमत से 8 सीट कम है. कांग्रेस को 78 सीटें और जेडीएस को 38 सीटें मिली हैं. अन्य के खाते में दो सीटें गई हैं. खंडित जनादेश आने के साथ ही कर्नाटक में जोड़तोड़ की राजनीति शुरू हो गई. कांग्रेस ने कुमारस्वामी को सीएम पद देने की पेशकश करते हुए जेडीएस को समर्थन का ऐलान कर बीजेपी को मुश्किल में डाल दिया. लेकिन राज्यपाल ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता देकर सियासी विवाद और गहरा दिया.