नई दिल्ली: भारत की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस फंड की कमी से जूझ रही है. हाल ही में पार्टी ने फैसला किया कि वह लोगों से वोट के साथ नोट भी मांगेगी. यानी चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस घर-घर जाकर चंदा मांगेगी. कांग्रेस के सीनियर नेता शशि थरूर ने भी मीडिया के सामने इस बात को माना था कि पार्टी पैसे की कमी से जूझ रही है. उन्होंने कहा था कि बीजेपी का सामना करने और चुनाव में होने वाले खर्च के लिए पार्टी को लोगों के पास जाना चाहिए. इस साल राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में उतरने से पहले कांग्रेस ने क्राउड फंडिंग शुरू की है. इसका उद्देश्य न सिर्फ पार्टी के लिए धन जमा करना है बल्कि लोगों में कांग्रेस की स्वच्छ छवि को भी चमकाना है.

राजस्थान में क्राउड फंडिंग के लिए कांग्रेस ने युवा पेशेवरों की एक टीम तैयार की है. यह ठीक उसी तरह है जैसे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने दो सफल अभियानों के दौरान किया था. ओबामा ने आम नागरिकों से जुड़ने के लिए एक उपकरण के रूप में भीड़ का उपयोग किया था और अमेरिकी चुनावों के तरीके को ही बदल दिया था. आजकल, दुनिया भर में भीड़ के माध्यम से अरबों डॉलर जुटाए जा रहे हैं. विश्व बैंक का मानना है कि ग्लोबल क्राउड फंडिंग 2025 तक 93 अरब डॉलर को पार कर सकता है. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा 2008 के चुनावों में 750 मिलियन डॉलर जुटाने में कामयाब रहे, जिनमें से 600 मिलियन तीन मिलियन लोगों ने दिए थे. यह प्रति व्यक्ति 86 डॉलर के आसपास बैठता है. 2011 में भी, उन्होंने व्यक्तिगत दान में 614 मिलियन डॉलर जुटाए जिनमें से 214 मिलियन छोटे दान दाताओं से आए थे.

कांग्रेस भी भारतीय राजनीति में स्वच्छ फंड के लिए आम लोगों के पास जा रही है. यही कारण है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी चीफ सचिन पायलट ने एक वीडियो जारी कर लोगों से कांग्रेस के लिए योगदान करने का अनुरोध किया. पायलट ने कहा कि क्राउड फंडिंग सार्वजनिक हिस्सेदारी और चुनाव में भागीदारी पैदा करेगी.

राजस्थान में क्राउड फंडिंग का अभियान कांग्रेस की उस स्ट्रेटजी का हिस्सा है जो वह आने वाले लोकसभा चुनाव में अपनाने जा रही है. क्राउड फंडिग के माध्यम से पार्टी स्वच्छ फंड जुटाना चाहती है. कांग्रेस की सोशल मीडिया इंचार्ज दिव्या स्पंदन का कहना है कि अधिकांश भारतीय पारंपरिक तरीकों से योगदान करते हैं, लेकिन हमारा डिजिटल फुटप्रिंट पूरे देश में बढ़ रहा है. क्राउड फंडिंग के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोग सीधे कांग्रेस से जुड़ रहे हैं.

इस साल की शुरुआत में, कांग्रेस ने कर्नाटक चुनावों के दौरान अपने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर क्राउड फंडिंग के अभियान की घोषणा की थी, जहां पहली बार उम्मीदवार विधानसभा चुनावों में बी श्रीरामुलु को ले गए थे. दूसरा क्राउड फंडिंग अभियान ओडिशा के 30 वर्षीय मुक्तिकांत बिस्वाल को समर्थन देने के लिए था जो सरकार को उसका वादा याद दिलाने के लिए 1400 किलोमीटर दूर दिल्ली पहुंचे थे. वर्तमान में क्राउड फंडिंग अभियान राहुल गांधी की सहयोगी कनिष्क सिंह और दिव्य द्वारा आयोजित किया जा रहा है.