जी न्यूज द्वारा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू की एक चुनावी रैली में लगाए गए ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारों को सामने लाने के बाद से कांग्रेस बुरी तरह उलझी हुई है. हालांकि, पार्टी के नेता अपनी बात पर अड़े हुए हैं और वे उलटे जी न्यूज पर ‘फर्जी वीडियो’ चलाने का आरोप लगा रहे हैं. हमारे सहयोगी अखबार डीएनए ने इस बारे में जी न्यूज के एडिटर इन चीफ सुधीर चौधरी से बात कीः

कांग्रेस कहती है कि जी न्यूज ने फर्जी वीडियो दिखाया है और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का कोई नारा नहीं लगाया गया. क्या यह सही आरोप है?
मैं इस आरोप को स्पष्ट तौर पर खारिज करता हूं कि यह वीडियो फर्जी है. यह 100 फीसदी प्रमाणिक है. इसको साबित करने के लिए हमारे पास कम से कम सात अन्य फीड्स हैं जिसे लाइव रिकॉर्ड किया गया था और प्रत्येक फीड में एक ही समय पर एक जैसा नारा है. आजकल यह फैशन बन गया है कि जब कांग्रेस का कोई नेता रंगे हाथों पकड़ा जाता है तो पार्टी वीडियो को फर्जी बताकर उसका बचाव करने लगती है. यह कुछ और नहीं बल्कि जवाबदेही से बचने के लिए कांग्रेस की एक दूसरी रणनीति है. जी न्यूज अपने वीडियो को पूरी तरह प्रमाणिक मानता है और वह उसके साथ खड़ा है.

सिद्धू ने भी धमकी दी है और दावा किया है कि ‘नानी याद दिला देंगे’. इस पर आप क्या कहेंगे?
नवजोत सिंह सिद्धू ने जिस भाषा का इस्तेमाल किया है उसपर मैं कड़ी आपत्ति जताता हूं. कांग्रेस हमेशा दावा करती है कि पार्टी अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करती है. वे देश की सबसे पुरानी पार्टी है. लेकिन जब उसका कोई बड़ा नेता इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करता है तो यह स्पष्ट तौर पर मीडिया की आवाज को दबाना है क्योंकि वह उनकी पार्टी लाइन पर नहीं चला. यह दिखाता है कि कांग्रेस और उसके नेताओं के अहंकार कितना चरम पर है.

यहां तक कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी इस मसले पर कुछ नहीं बोला है. आपका अगला कदम क्या होगा?
जी न्यूज हमेशा देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में भरोसा करता है. हम कानून व्यवस्था में भरोसा करते हैं इसलिए न्याय के लिए कानून के दायरे में उपलब्ध सभी कदम उठाएंगे. हमने अपनी लिखित शिकायत न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशंस और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया को भेजा है. हमने भारतीय निर्वाचन आयोग को भी एक शिकायत भेजी है. अगर जरूरी हुआ तो हम कोर्ट में भी जाएंगे. इसलिए हम कांग्रेस द्वारा अपनाए गए रुख के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करवा रहे हैं, वो भी लोकतांत्रिक तरीके से. यह निराशाजनक है कि एडिटर्स गिल्ड ने इस मामले पर संज्ञान नहीं लिया है, लेकिन मैं आशा करता हूं कि मीडिया का एक बड़ा हिस्सा हमारे इस अभियान को सपोर्ट करेगा. मैं यह भी मानता हूं कि यह केवल मेरी लड़ाई नहीं है, बल्कि इसे पूरी मीडिया बिरादरी की लड़ाई के रूप में देखा जाना चाहिए.

क्या सिद्धू ये सब अपने आप कर रहे हैं या फिर उनको पार्टी का समर्थन है?
कांग्रेस जैसे बड़े सेटअप में सिद्धू जैसा को कोई नेता ये सब अकेले नहीं कर सकता. आपको यह जरूर देखना होगा कि जब वह पाकिस्तान गए थे तो उनके अपने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ही नहीं चाहते थे कि वह वहां जाएं. लेकिन पाकिस्तान से लौटने के बाद सिद्धू ने स्पष्ट कर दिया उनके कैप्टन अमरिंदर नहीं, राहुल गांधी हैं. तब राहुल ने असहमति जताई, लेकिन इस बार कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने उनके इस कदम को जायज ठहराया है.