बेंगलुरूः अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को टक्कर देने की रणनीति पर काम कर रही कांग्रेस को तगड़ा झटका लग सकता है. राज्य में उसकी सहयोगी पार्टी JD(S) ने संकेत दिया है कि वह लोकसभा चुनाव में अपने दम पर मैदान में उतर सकती है. JD(S) ने कहा है कि अगर कांग्रेस पार्टी एकतरफा फैसला लेना बंद नहीं करेगी तो वह ऐसा करने के लिए मजबूर हो जाएगी. गौरतलब है कि राज्य में कांग्रेस बड़ी पार्टी होते हुए भी JD(S) के एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में सरकार चला रही है, लेकिन सरकार के गठन के अगले दिन से ही दोनों दलों के बीच तकरार की खबरें आती रहती हैं.

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इस साल राज्य में गठबंधन सरकार बनने के बाद हुए पंचायत चुनाव में भी दोनों दल अलग-अलग उतरे थे. JD(S) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एचडी देवेगौड़ा का कहना है कि अभी तक उनकी पार्टी ने लोकसभा चुनाव को लेकर कोई फैसला नहीं किया है. हालांकि पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि उनके नेता दोनों दलों के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’ के पक्ष में हैं. इकोनॉमिक टाइम्स अखबार से बातचीत में देवेगौड़ा ने कहा है कि वह यह नहीं चाहते कि गठबंधन में दरार या इसके टूटने का ठीकरा उनके ऊपर फोड़ा जाए. उन्होंने कहा कि काफी हद तक यह इस बात पर भी निर्भर है कि कांग्रेस हमें कितना सम्मान देती है.

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इस पर है विवाद
दरअसल, दोनों दलों के बीच विवाद राज्य सरकार की ओर से संचालित बोर्डों और निगमों में नियुक्तियों के मसले पर पैदा हुआ. कांग्रेस पार्टी ने JD(S) से पूछे बिना इन नियुक्तियों की घोषणा कर दी, जबकि इनमें से कुछ बोर्ड और निगम JD(S) के मंत्रियों के अधीन आते हैं. इसके अलावा कांग्रेस पार्टी ने अपनी पार्टी के एक नेता को मुख्यमंत्री का राजनीतिक सचिव नियुक्त करने की घोषणा कर दी. इससे JD(S) नाराज हो गया.

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इस बारे में गौड़ा ने कहा कि उन्हें इसमें समस्या नहीं है कि बोर्ड और निगमों में उनकी पार्टी को एक-तिहाई हिस्सा मिला है, लेकिन हमें जो मिला उनमें से अधिकत्तर बोर्डों और निगमों का बजट काफी कम है. उन्होंने कहा कि वह जल्द ही इसको लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलेंगे. उन्होंने कहा कि अभी राहुल गांधी कर्नाटक में कांग्रेस के नए मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे में लगे हूए हैं.

उधर, JD(S) के प्रवक्त रमेश बाबू ने कहा कि हम हमेशा देखते हैं कि कांग्रेस पार्टी बड़े भाई की तरह पेश आती है. ऐसे में हमारे कार्यकर्ताओं और नेताओं का मानना है कि हमें राज्य की सभी 28 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए. ऐसी स्थिति में देवेगौड़ा हासन और बेंगलुरू नॉर्थ सीट से चुनाव लड़ सकते हैं.