कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ सांसद और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष रहे अधीर रंजन चौधरी को सदन में पार्टी का नेता चुना है. लेकिन, चौधरी के चयन से एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर राहुल गांधी ने क्यों इस जिम्मेवारी को स्वीकार नहीं किया? पार्टी के कई नेता मानते हैं कि कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव लड़ा था और अब उन्हें पार्टी को फ्रंट से लीड करते हुए दिखना चाहिए था. इसके लिए उन्हें सदन में पार्टी के नेता की जिम्मेवारी उठानी चाहिए थी. माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद से राहुल गांधी अध्यक्ष पद भी छोड़ने पर अड़े हुए हैं. इसके लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलवार को पार्टी की बैठक में भी इस बारे में कोई चर्चा नहीं हुई. Also Read - Rahul Gandhi Push-ups Video: राहुल गांधी एक साथ किए 15 पुश अप्स, छात्र को मार्शल आर्ट के स्टेप भी बताए, देखें VIDEO

अंग्रेजी अखबार टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि लोकसभा में पार्टी के नेता के पास एक पूर्णकालिक जिम्मेवारी होती है. उसे सदन की कार्यवाही में लगे रहना पड़ता है. राहुल गांधी सदन की कार्यवाही में लगे रहते हैं लेकिन उनके पास इससे भी बड़ी जिम्मेवारी है, जिसे उन्हें सदन के बाहर निभानी है. उक्त नेता ने बताया कि राहुल गांधी ने पार्टी को आश्वस्त किया है कि वह और संघर्ष करेंगे और नरेंद्र मोदी के खिलाफ जनमत तैयार करने में लगे रहेंगे. इस कारण उनका मानना है कि सदन में नेता की जिम्मेवारी किसी दूसरे नेता को निभानी चाहिए. उक्त नेता ने ये भी कहा कि सोनिया गांधी संसदीय दल की अध्यक्ष हैं. ऐसे में अगर राहुल गांधी भी इस अहम पद को ग्रहण करते तो यह अच्छा नहीं लगाता. Also Read - VIDEO: राहुल गांधी ने कन्याकुमारी में किया रोड शो, छात्राओं के साथ पारंपरिक नृत्य भी किया

Adhir Ranjan Chowdhury

अधीर रंजन चौधरी.

वैसे अधीर रंजन चौधरी को यह जिम्मेवारी मिलने के पीछे उनकी फाइटर की छवि और वरिष्ठता है. वह 1999 से लगातार सांसद हैं. इस पद के लिए केरल से कांग्रेस के 7 बार के सांसद के. सुरेश के नाम पर भी विचार किया गया. इसके अलावा पंजाब से सांसद मनीष तिवारी और शशि थरूर के नाम पर भी चर्चा हुई लेकिन अधीर रंजन चौधरी की जमीन से जुड़े होने की राजनीति ने उनको बढ़त दिला दी. चौधरी अंग्रेजी, हिंदी और बांग्ला तीनों भाषाओं के अच्छे वक्ता हैं. उनको पिछले लोकसभा में ज्योतिरादित्य सिंधिया. दीपेंद्र हुडा, राजीव सातव और सुष्मिता देव के साथ कांग्रेस के फाइटर नेताओं में गिना जाता था. वैसे चौधरी, पिछली लोकसभा में पार्टी के नेता रहे मल्लिकार्जुन खड़गे की जगह ले रहे हैं. खड़गे ने मात्र 45 सांसदों के साथ सदन में एक छाप छोड़ी और सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी. Also Read - बिहार में कांग्रेस विधायक संतोष मिश्रा के भतीजे की गोली मारकर हत्या, हमलावरों ने बरसाईं अंधाधुंध गोलियां

सदन में कांग्रेस की आक्रमकता को लेकर पूछे जाने पर चौधरी ने कहा कि 2014 से 2019 के बीच हमने जमीनी मुद्दे उठाए. जीत ने जीमीन सच्चाई नहीं बदली है. इसमें कोई शक नहीं है कि देश में खेती-किसानी और नौकरी की समस्या बनी हुई है. हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को जवाबदेह बनाएंगे.