नई दिल्ली. पुणे में जातीय हिंसा पर लोकसभा में जबर्दस्त हंगामा हुआ. कर्नाटक के गुलबर्गा से कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को उठाया. खड़गे ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे आरएसएस का हाथ बताया. खड़गे ने कहा कि समाज में बंटवारा करने के लिए कट्टर हिंदुवादी ताकतों ने, वहां मौजूद आरएसएस के लोगों का हाथ इसके पीछे है. उन्होंने ही ये काम करवाया है.

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में पूछा कि आखिर किसने इस घटना को शुरू किया और इसमें हस्तक्षेप किया? उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज से कराई जाए और पीएम भी इस मामले पर बयान दें. वह चुप नहीं रह सकते. ऐसी घटनाओं पर वह मौनी बाबा बन सकते हैं.

केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार ने इसपर कहा कि कांग्रेस बांटो और राज करो की नीति इस्तेमाल कर रही है. मोदी जी सबका साथ, सबका विकास करके देश को साथ ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि आग को बुझाने की बजाय, भड़काने का काम मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस पार्टी कर रही है. इसे देश बर्दाश्त नहीं करेगा.

राज्यसभा हुई स्थगित

राज्यसभा में विपक्ष के कई सदस्यों ने महाराष्ट्र में जातीय हिंसा का मुद्दा उठाने का प्रयास किया लेकिन सभापति एम वेंकैया नायडू ने इसकी अनुमति नहीं दी और सदन की कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी. सुबह सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति ने जरूरी दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए. इसके बाद उन्होंने शून्यकाल शुरू करने की घोषणा करते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद से अपना मुद्दा उठाने को कहा.

इसी दौरान बीएसपी के सतीश चंद्र मिश्रा ने महाराष्ट्र में जातीय हिंसा का मुद्दा उठाने का प्रयास किया और आरोप लगाया कि दलितों के खिलाफ हिंसा के लिए बीजेपी व आरएसएस जिम्मेदार है. कुछ अन्य सदस्यों ने भी यह मुद्दा उठाने का प्रयास किया और कहा कि उन्होंने इस पर चर्चा के लिए नोटिस दिए हैं. लेकिन सभापति ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी और कहा कि उनकी बातें कार्यवाही में शामिल नहीं की जाएंगी.

इस बीच सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के कई सदस्य अपने स्थानों पर खड़े हो गए. नायडू ने कहा कि राजनीति करने से कोई लाभ नहीं होगा और वह सबकी बात सुनने को तैयार हैं. इसके बाद अचानक उन्होंने 11 बजकर करीब 10 मिनट पर सदन की बैठक दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. एक बार के स्थगन के बाद बैठक जब फिर शुरू हुई तो सदन में वही नजारा देखने को मिला. विपक्ष के कई सदस्य अपने स्थान पर खड़े होकर कुछ कहने का प्रयास कर रहे थे. सभापति नायडू ने कहा कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद सहित कई सदस्यों का नोटिस मिला था और उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को बोलने की अनुमति भी दी थी.

इस बीच, सदन में हंगामा मचता रहा. सभापति ने इसे देखते हुए बैठक को महज एक मिनट के भीतर ही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया.