सलमान खुर्शीद का दर्द, कहा- हमने रोका, फिर भी राहुल गांधी ने छोड़ा पद, ये नहीं होना चाहिए था

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. उनके इस्तीफे पर बहस चार महीने से भी ज्यादा समय से जारी है.

Published date india.com Updated: October 9, 2019 8:20 PM IST
सलमान खुर्शीद का दर्द, कहा- हमने रोका, फिर भी राहुल गांधी ने छोड़ा पद, ये नहीं होना चाहिए था

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) में करारी हार के बाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. उनके इस्तीफे पर बहस चार महीने से भी ज्यादा समय से जारी है. अब इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) ने बुधवार को कहा कि राहुल को पद पर बने रहना चाहिए था. खुर्शीद ने कहा, “हमारे आग्रह के बावजूद, राहुल गांधीजी ने पद से इस्तीफा दे दिया. कई लोगों ने उन्हें पद पर बने रहने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने पद छोड़ दिया. यह उनका निर्णय था और हमें इसका आदर करना चाहिए. सलमान ने ये भी कहा कि वह अपना दर्द बयान कर रहे हैं. ताकि बात सही जगह पर पहुंच सके. ऐसा नहीं होना चाहिए था.”

सलमान खुर्शीद ने यह बयान ऐसे समय दिया है, जब महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2019) में महज दो सप्ताह से भी कम समय बचा है और राहुल गांधी विदेश चले गए हैं, जिसे लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं. रपटों के अनुसार, राहुल ‘ध्यान’ के लिए कंबोडिया गए हुए हैं. मई में लोकसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद पार्टी अभी भी इससे उबरने की कोशिश कर रही है. सोनिया गांधी के पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बनने के बावजूद शीर्ष नेतृत्व पार्टी पर अपनी पकड़ बनाने में नाकाम रहा है. पार्टी के कई नेता महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव से पहले पार्टी छोड़कर चले गए हैं.

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वर्ष 2014 में, कांग्रेस ने 543 लोकसभा सीटों में से केवल 44 सीटें जीती थी, जिसके बाद पार्टी ने पूर्व मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता में हार के कारणों की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया था. इसकी रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है. वहीं इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को केवल 52 सीटों से ही संतोष करना पड़ा. पार्टी की हार को लेकर केवल एक ही बात सार्वजनिक है कि एंटनी ने 2014 की हार के लिए कांग्रेस द्वारा अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण को जिम्मेदार ठहराया है. हालांकि, इस वर्ष हुए लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के शर्मनाक प्रदर्शन के लिए कोई भी समिति गठित नहीं की गई.

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