तिरुवनंतपुरम/कोलकाता। संघ के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के शिरकत करने को लेकर कल तक कांग्रेस के नेता टिप्पणी करने से इनकार कर रहे थे, लेकिन बुधवार को कांग्रेस नेताओं के सुर बदल गए. कांग्रे्स के नेताओं ने पूर्व राष्ट्रपति से नागपुर में आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने के फैसले को धर्मनिरपेक्षता के हित में वापस लेने का आग्रह किया. वहीं, पी चिदंबरम ने कहा कि अगर प्रणब मुखर्जी जा रहे हैं तो संघ को उसकी गलती बताएं. हालांकि कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं ने इस पर किसी तरह की टिप्पणी से इनकार कर दिया. कुछ नेताओं खुलकर अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए पूर्व राष्ट्रपति से कार्यक्रम में न जाने की अपील की.

चिदंबरम बोले, संघ की गलतियां बताएं

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति ने अब आमंत्रण स्वीकार कर लिया है तो उन्हें जाना चाहिए और आरएसएस को यह बताये कि उनकी विचारधारा में क्या गलत है. उन्होंने (मुखर्जी) निमंत्रण स्वीकार कर लिया और ऐसे में इस पर बहस करने का कोई मतलब नहीं बनता कि उन्होंने निमंत्रण क्यों स्वीकार किया. इससे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप वहां जाएं और उनको (आरएसएस) यह बताएं कि उनकी विचारधारा में क्या गलत है.

उधर, पार्टी प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने इस मामले पर कोई टिप्पणी से इंकार कर दिया. वहीं, मुखर्जी के आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार किए जाने को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री सीके जाफर शरीफ और कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं. केरल से कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने मुखर्जी को एक पत्र लिखकर इस कार्यक्रम में शामिल होने से बचने का आग्रह किया जबकि पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रमुख अधीर चौधरी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी हनुमंत राव ने भी इसी तरह का आग्रह किया.

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मुखर्जी को सात जून को नागपुर में संगठन के मुख्यालय में आयोजित होने वाले आरएसएस कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण शिविर (संघ शिक्षा वर्ग) के समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है. आरएसएस के एक पदाधिकारी के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति ने संघ के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है. उनकी पार्टी के सहयोगी अभिषेक सिंघवी ने कहा कि पार्टी इस पर कोई प्रतिक्रिया देने से पहले मुखर्जी का रूख जानना चाहेगी.

संघ पर कांग्रेस नेताओं के आरोप

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता चेन्नीथला ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) धार्मिक आधार पर देश को बांटने का प्रयास कर रहा है और रिमोट कंट्रोल के जरिये सरकार चलाना चाहता है. चेन्निथला ने अपने पत्र में कहा, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जिसने हमारे देश के प्रथम नागरिक और धर्मनिरपेक्षता के महान दूत के रूप में कार्य किया है, मैं आपको 7 जून 2018 को आरएसएस की बैठक में भाग लेने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करता हूं.

आरएसएस को सांप्रदायिक संगठन बताते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उनका दृष्टिकोण हिन्दू राष्ट्र का निर्माण करना है. अधीर चौधरी ने आरएसएस के कार्यक्रम में शिरकत करने के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के फैसले पर हैरानी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि वह इस निर्णय को भगवा संगठन के खिलाफ मुखर्जी की पिछली टिप्पणियों से नहीं जोड़ पा रहे हैं. मुखर्जी को आरएसएस कार्यक्रम में भाग लेने का फैसला वापस लेना चाहिए.

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चौधरी ने कहा, मेरा सवाल है कि क्या उन्हें (मुखर्जी को) लगता है कि आरएसएस के खिलाफ उनके पूर्व के बयान गलत थे. हमें आज भी याद है कि वरिष्ठ नेता के रूप में प्रणव मुखर्जी ने किस तरह से आरएसएस की आलोचना करते हुए उसे सांप्रदायिक और विभाजनकारी संगठन बताया था. नागपुर में आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने के प्रणव मुखर्जी के फैसले को सुनकर मैं हैरान हूं. अन्य कांग्रेस नेताओं की तरह मुझे भी यह जानकार ताज्जुब हुआ. उन्होंने कहा कि हालांकि मुखर्जी ना तो अब राष्ट्रपति हैं और ना ही कांग्रेस नेता. ऐसे में वह किसी तरह का निर्णय करने के लिए स्वतंत्र हैं.

मुखर्जी से कांग्रेस नेताओं की अपील 

वरिष्ठ कांग्रेस नेता वी हनुमंथ राव ने आज कहा कि धर्मनिरपेक्षता के हित में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को आरएसएस कार्यक्रम में शामिल होने के अपने फैसले को वापस ले लेना चाहिए. एआईसीसी सचिव और पूर्व राज्यसभा सदस्य राव ने कहा कि मुखर्जी को आरएसएस की बैठक में शामिल नहीं होना चाहिए क्योंकि वह एक सांप्रदायिक संगठन है. मैं उनसे अनुरोध कर रहा हूं कि वह अपना फैसला वापस ले लें.

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उन्होंने कहा कि मुखर्जी वरिष्ठ कांग्रेस नेता रहे हैं और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उनका सम्मान करते हैं. उनकी (आरएसएस) विचारधार हिन्दुत्व है. वे धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं. वे हिन्दू देश चाहते हैं. वह (मुखर्जी) कैसे जा सकते हैं? इस देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, हर कोई हैं इसलिए मेरा अनुरोध है कि उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और उन्हें नहीं जाना चाहिए. राव ने कहा कि वह इस संबंध में मुखर्जी को पत्र लिखेंगे.

वहीं, दिल्ली में एआईसीसी की ब्रीफिंग में कांग्रेस आज दूसरे दिन इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया करने से बची. प्रणव के निर्णय पर प्रतिक्रिया पूछे जाने पर पार्टी के प्रवक्ता आर पी एन सिंह ने कहा कि हम पूर्व राष्ट्रपति पर कोई टिप्पणी व्यक्त नहीं करना चाहते है.