नई दिल्ली: राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की एसपीजी सुरक्षा वापस लिए जाने का मुद्दा उठाया. कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार को इस संबंध में अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और उसे दलगत भावना से उठकर काम करना चाहिए.

हालांकि, सत्तारूढ़ भाजपा ने कहा कि यह फैसला गृह मंत्रालय का है और इसमें कोई राजनीति नहीं है. बता दें कि कांग्रेस ने कल भी इस मामले को संसद में उठाया था.

पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया और कहा कि नेताओं की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि खतरों को देखते हुए चारों नेताओं की एसपीजी सुरक्षा बहाल की जानी चाहिए.

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार को इस संबंध में अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और उसे दलगत भावना से उठकर काम करना चाहिए.

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि ऐसे फैसले गृह मंत्रालय की एक विशेष समिति खतरों की आशंका पर गौर करते हुए करती है. उन्होंने कहा कि लोगों को लिट्टे से खतरा था, लेकिन अब लिट्टे समाप्त हो गया है.

स्वामी ने कहा कि इसके अलावा जिनकी सुरक्षा की बात की जा रही है, उन्होंने खुद ही राजीव गांधी के हत्यारों की सजा कम किए जाने की अपील की और जेल में जाकर मुलाकात तक की.

हालांकि, सभापति एम वेंकैया नायडू ने स्वामी को टोकते हुए राजीव गांधी के हत्यारों से जुड़े मुद्दे को इस विषय में नहीं उठाने को कहा.

भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा कि इस फैसले में कोई राजनीति नहीं है और उनकी सुरक्षा वापस नहीं ली गई है. नड्डा ने कहा कि गृह मंत्रालय में एक तय प्रक्रिया और प्रोटोकॉल है और उसी के तहत फैसला किया जाता है.