तिरुवनंतपुरम. कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केरल के उन मछुआरों की नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अनुशंसा की है जिन्होंने 2018 में राज्य में आई बाढ़ के दौरान बचाव कार्यों में मदद की थी. तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य थरूर ने नॉर्वे की नोबेल समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि केरल के मछुआरों का समूह त्रासदी के दौरान अपनी जान और अपनी जीविका के साधन नौकाओं की परवाह किए बिना नागरिकों को बचाने के काम में जुट गए. थरूर ने अपने ढाई पन्नों के पत्र में केरल की बाढ़, इससे प्रभावित लोगों के दर्द और उनकी परेशानियों की विस्तार से जानकारी दी है.

थरूर ने कहा कि मछुआरे अपनी नौकाओं को अंदरूनी इलाकों में ले गए और स्थानीय स्थितियों की बेहतर जानकारी होने के वजह से राहत कार्य में उनकी हिस्सेदारी काफी सहायक साबित हुई. सांसद ने कहा कि उन्होंने अपने आस-पड़ोस में फंसे हुए कर्मियों की न सिर्फ सहायता की बल्कि बचाव टीमों की नौकाओं का मार्गदर्शन भी किया. उन्होंने कहा कि उनकी बाढ़ के दौरान लोगों की जान बचाने की सेवा स्पष्ट तौर पर दिखी. थरूर ने नोबेल पुरस्कार समिति को लिखे अपने पत्र में कहा है कि जून से लेकर अगस्त 2018 के महीनों में मानसून की वजह से केरल के कई इलाकों में बाढ़ आई थी. ऐसी बाढ़ राज्य के इतिहास में अपनी तरह की पहली घटना थी. भीषण तबाही के मंजर के बीच राज्य के मछुआरों ने जिस तरह अपनी जान हथेली पर रखकर लोगों की जानें बचाई थीं, ऐसा उदाहरण मिलना मुश्किल है.

तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद ने केरल में वर्ष 2018 में हुई मानसून की रिकॉर्डतोड़ बारिश और इसके कारण आई आपदा का जिक्र करते हुए नोबेल पुरस्कार समिति को करीब ढाई पन्नों का पत्र लिखा है. अपने पत्र में उन्होंने केरल के 14 जिलों के बाढ़ प्रभावित होने, राज्य और केंद्र सरकार द्वारा आपदा राहत कार्यों, बाढ़ के कारण प्रभावित हुए करीब 50 लाख से ज्यादा लोगों के दर्द को बयां किया है. थरूर ने पत्र में कहा है कि आर्मी, नेवी, कोस्ट गार्ड और एनडीआरएफ के साथ-साथ राज्य के 4500 से ज्यादा मछुआरों को बाढ़ राहत के काम में लगाया गया था. सरकारी राहत कार्य बल के साथ-साथ इन मछुआरों ने जिस तरह आपदा से निपटने में लोगों की मदद की, उन्हें बाढ़ प्रभावित जगहों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, वह काबिले तारीफ है.

(इनपुट – एजेंसी)