
Digpal Singh
साल 2005-2006 में माखनलाल चतुर्वेदी युनिवर्सिटी से PGDM करने के बाद दो वर्ष तक कई अखबारों के लिए फ्रीलांसर के तौर पर काम किया. साल 2008 में लाइवहिंदुस्तान (HT Media) ... और पढ़ें
Manipur Riots: कांग्रेस नेताओं ने आज यानी मंगलवार 30 मई को राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. इस दौरान कांग्रेस ने राष्ट्रपति को मणिपुर के हालात पर एक मेमोरेंडम सौंपा. कांग्रेस ने राष्ट्रपति को सौंपे मेमोरेंडम में कुल 12 मांगें रखी हैं, जिनमें से एक सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज को लेकर एक हाई लेवल इंक्वायरी कमीशन से जांच कराने की मांग भी है. कांग्रेस के डेलिगेशन में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई नेता मौजूद थे.
मणिपुर में पिछले कुछ दिनों से जातीय हिंसा में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है. राज्य के हालात अब भी सामान्य नहीं हैं. इस बीच आज यानी मंगलवार 30 मई को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह राज्य के दौरे पर हैं. कांग्रेस के इस डेलिगेशन में मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, के.सी. वेणुगोपाल सहित मणिपुर के कांग्रेस नेता भी शामिल थे.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह चार दिवसीय यात्रा पर सोमवार रात मणिपुर पहुंचे. मणिपुर पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज इंफाल में अलग-अलग सिविस सोसाइटी ऑर्गेनाइजेशन के डेलिगेशन के साथ मुलाकात की. यहां वह जातीय हिंसा का समाधान निकालकर शांति बहाल करने के उद्देश्य से अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे.
वह दिल्ली से एक विशेष विमान से इंफाल के बीर टीकेंद्रजीत इंफाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे. वह बुधवार को संवाददाता सम्मेलन को भी संबोधित कर सकते हैं और राज्य में जारी हिंसा पर नियंत्रण के लिए कदमों की घोषणा कर सकते हैं.
सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि वह गुरुवार सुबह इंफाल से लौट सकते हैं. मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से शाह की यह राज्य की पहली यात्रा है. मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद मणिपुर में जातीय झड़पों में 80 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी.
दिल्ली स्थित एक स्वतंत्र थिंक टैंक राइट्स एंड रिस्क एनालिसिस ग्रुप (आरआरएजी) ने सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मणिपुर में 6 मई को अनुच्छेद 355 लागू होने के बावजूद जातीय हिंसा रुक नहीं पाने के मद्देनजर राष्ट्रपति शासन लगाने पर विचार करने का आग्रह किया.
आरआरएजी के निदेशक सुहास चकमा ने कहा कि मेइती को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के मणिपुर हाईकोर्ट के फैसले पर कुकी आदिवासियों के विरोध के बाद 3 मई को शुरू हुई जातीय हिंसा में 80 से अधिक लोग मारे गए थे, जबकि 250 से अधिक लोग घायल हो गए थे. आरआरएजी मानवाधिकारों का हनन रोकने के उद्देश्य से जोखिम का विश्लेषण करता है.
मणिपुर में लगभग 26 हजार लोगों को आंतरिक रूप से विस्थापित किया गया है, जबकि सुरक्षा के लिए अन्य 50 हजार लोगों को उनके समुदायों के भीतर स्थानांतरित किया जाना था.
चकमा ने कहा कि राष्ट्रपति शासन लागू करना तत्काल जरूरी है, क्योंकि तब केंद्र सरकार एक तटस्थ और स्वीकार्य प्राधिकरण के रूप में हिंसा को रोकने के लिए इंटर कम्युनिटी डायलॉग शुरू कर सकती है.
उन्होंने कहा, लगभग 50 हजार लोगों का उनके संबंधित समुदायों के भीतर सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन 1947 में भारत के विभाजन के दौरान लोगों के विस्थापन की याद दिलाता है.
(इनपुट – एजेंसियां)
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