नई दिल्ली: उपुचनावों में विपक्षी एकजुटता के सकारात्मक परिणाम से उत्साहित कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि हर प्रदेश की स्थिति के हिसाब से गठबंधन की नीति तय होगी, हालांकि हर जगह मकसद यही होगा कि भाजपा विरोधी मतों का बंटवारा नहीं हो.

पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘‘क्षेत्रीय स्तर पर सोच-समझ कर और रणनीतिक रूप से गठबंधन होता है. उद्देश्य एक ही रहेगा. उद्देश्य है कि भाजपा के विरुद्ध वोट का बंटवारा न हो या न्यूनतम हो. इसके लिए अलग-अलग प्रदेश में अलग-अलग नीति होगी और किस प्रदेश में किसके साथ सहमति बनेगी, इसके लिए इंतजार करना होगा.’’

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के एक बयान के संदर्भ में सिंघवी ने कहा, ‘‘मुझे पता नहीं है कि स्वामी भाजपा में हैं या नहीं हैं. लेकिन जो भाजपा के साथ हैं, उनकी बात करिए. अभी पिछले तीन दिनों में आपने सुना कि शिवसेना क्या कह रही है, भाजपा के एक पूर्व सांसद क्या कह रहे हैं? आपने सुना कि अकाली दल कुछ दबी आवाज में क्या कह रहा है, आपने देखा है कि तेदेपा ने क्या कर दिया और क्या कह रहे हैं?’’

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किसानों से जुड़े मुद्दे पर कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया, ‘‘यह सरकार किसानों के खिलाफ एक प्रकार का षड्यंत्र कर रही है. किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और कहा जा रहा है कि 2022 में उनकी आय दोगुनी हो जाएगी। आय में मौजूदा विकास दर 1.9 या 2 प्रतिशत प्रतिवर्ष है और इस हिसाब से 2052 में भी आय दोगुनी नहीं हो पाएगी.

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गुरुवार को उपचुनावों के आए नतीजों में भाजपा को मिली हार से कांग्रेस ही नहीं, दूसरी विपक्षी पार्टियां भी खुश हैं. सबकी निगाहें अब 2019 के आम चुनाव पर लगी हें. विपक्षी पार्टियों को लगता है कि कर्नाटक और हालिया उपचुनावों के नतीजों से उसे भाजपा को सत्‍ता से बाहर करने का फॉर्मूला मिल गया है. विपक्षी एकजुटता 2019 में भाजपा की सत्‍ता में वापसी के रास्‍ते में बड़ी रुकावट साबित हो सकता है, लेकिन विपक्षी पार्टियों के साथ समस्‍या यह है कि भाजपा-विरोध के नाम पर एकजुट होने के बावजूद राज्‍यों में वे एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी हैं. कांग्रेस इसी को ध्‍यान में रखकर हर राज्‍य के लिए अलग-अलग नीति पर जोर दे रही है. बड़ा सवाल यह है कि दूसरी पार्टियां भी उसकी इस नीति को मानेंगी या नहीं.