नई दिल्ली : चंद्रयान -2 के लैंडर ‘विक्रम’ का चांद पर उतरते समय जमीनी स्टेशन से संपर्क टूटने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को कहा कि यह सफर थोड़ा लंबा जरूर हुआ है लेकिन आने वाले कल में सफलता जरूर मिलेगी. सोनिया ने एक बयान में इसरो के वैज्ञानिकों के उल्लेखनीय प्रयासों की सराहना की. उन्होंने कहा, ‘हम इसरो और इससे जुड़े पुरुषों एवं महिलाओं के ऋणी हैं. उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण ने भारत को अंतरिक्ष की दुनिया में अग्रणी देशों की कतार में शामिल कर दिया है और आगे की पीढ़ियों को प्रेरित किया है कि वे सितारों तक पहुंचे.’

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कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘यह हमारे वैज्ञानिकों की उल्लेखनीय क्षमता, ख्याति और हर भारतीय के दिल में उनके लिए खास जगह होने का प्रमाण है.’’उन्होंने कहा, ‘चंद्रयान का सफर थोड़ा लंबा जरूर हुआ है लेकिन इसरो का इतिहास ऐसी मिसालों से भरा पड़ा है कि नाउम्मीदी में उम्मीद पैदा हुई. वे कभी हार नहीं मानते. मुझे कोई संदेह नहीं है कि हम वहां पहुंचेंगे, भले ही आज नहीं पहुंच पाए, लेकिन कल हम जरूर पहुंचेंगे.’ उन्होंने इसरो की अतीत की सफलताओं का उल्लेख किया और कहा कि हर रुकावट भविष्य की सफलता से पहले का एक पड़ाव भर है.

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पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘इसरो को ‘चंद्रयान-2′ मिशन पर उसके बेहतरीन कार्य के लिए बधाई. आपका भाव और समर्पण हर भारतीय के लिए एक प्रेरणा है. आपका काम बेकार नहीं जाएगा. इसने कई और महत्वपूर्ण तथा महत्वाकांक्षी भारतीय अंतरिक्ष मिशनों की नींव रखी है.’ कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा, ” समूचा देश इस समय इसरो की टीम के साथ खड़ा है. अंतरिक्ष एजेंसी के कठिन परिश्रम और प्रतिबद्धता ने देश को गौरवान्वित किया है.”


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गौरतलब है कि चंद्रयान -2 के लैंडर ‘विक्रम’ का चांद पर उतरते समय जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया. संपर्क तब टूटा, जब लैंडर चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था. लैंडर को रात लगभग एक बजकर 38 मिनट पर चांद की सतह पर लाने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन चांद पर नीचे की तरफ आते समय 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर जमीनी स्टेशन से इसका संपर्क टूट गया.

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पार्टी के वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने ट्वीट किया कि इसरो की टीम का समर्पण और कठिन परिश्रम ‘हम सभी के लिए एक प्रेरणा है.’ पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “चंद्रयान- 2 मिशन इस बात का प्रमाण है कि इसरो के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में नए मार्ग प्रशस्त किए हैं और हर भारतीय को गौरवान्वित किया है.” उन्होंने कहा, ” हम इस अवसर को आगे बड़ी संभावना और नयी ऊंचाइयों पर पहुंचने के तौर पर देखते हैं. भविष्य उज्ज्वल ही उज्ज्वल है.’ गौरतलब है कि चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ का चांद पर उतरते समय जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया. सपंर्क तब टूटा जब लैंडर चांद की सतह से बस 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था.