Congress President Sonia Gandhi writes a letter to the Prime Minister Modi: देश में पेट्रोल, डीजल के बढ़ते दामों को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खत लिखा है. अपने खत में सोनिया गांधी ने ईंधन के बढ़ते दामों को कहा है कि कीमतें ‘ऐतिहासिक एवं अव्यावहारिक’’ हैं. उन्होंने सरकार से बहाना बनाने के बजाए समाधान खोजने को भी कहा है.Also Read - Dinesh Sharma's Profile: अटल बिहारी वाजपेयी ने मांगे थे जिनके लिए वोट, जानें उन दिनेश शर्मा के बारे में सब कुछ

सोनिया गांधी ने अपने पत्र में लिखा, “मुझे उम्मीद है कि सरकार बहाने खोजने की बजाय समाधान खोजने पर ध्यान देगी.” Also Read - Capt. Amarinder Singh ने चुनाव से पहले कांग्रेस और मुख्यमंत्री पद छोड़कर बनाई नई पार्टी, जानें उनके बारे में सबकुछ

सोनिया गांधी ने अपने खत में लिखा है कि जिस तरह जीडीपी ‘गोता खा रही’ है और ईंधन के दाम बेतरतीब बढ़ रहे हैं, सरकार अपने आर्थिक ‘कुप्रबंधन’ का ठीकरा पिछली सरकारों पर फोड़ने में लगी है. उन्होंने लिखा कि ईंधन के बढ़े दाम वापस लें और इसका लाभ हमारे मध्यम एवं वेतनभोगी वर्ग, किसानों, गरीबों तक पहुंचाएं. Also Read - UP Election 2022: आगरा में 6 उम्मीदवारों ने चुनाव के लिये नामांकन किया, एक ट्रांसजेंडर भी मैदान में

गांधी ने मोदी को पत्र लिख कर कहा,‘‘ मैं यह पत्र आपको आसमान छूती तेल और रसोई गैस की कीमतों से हर नागरिक के लिए उत्पन्न गहन पीड़ा एवं संकट से अवगत कराने के लिए लिख रही हूं. एक तरफ भारत में रोजगार खत्म हो रहा है, कर्मचारियों का वेतन घटाया जा रहा है और घरेलू आय निरंतर कम हो रही है तो वहीं दूसरी ओर मध्यम वर्ग और सामाज में हाशिए पर रहने वाले लोग रोजी-रोजी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. तेजी से बढ़ती महंगाई और घरेलू सामान एवं हर आवश्यक वस्तु की कीमत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी ने इन चुनौतियों को और अधिक गंभीर बना दिया है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ यह दुखद है कि संकट के इस वक्त में भी सरकार लोगों के कष्ट और पीड़ा दूर करने के बजाए उनके दुख और तकलीफ बढ़ाकर मुनाफाखोरी कर रही है.’’ मूल्य वृद्धि से दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 90.58 रुपए प्रति लीटर और मुंबई में 97 रुपए प्रति लीटर हो गई है. गांधी ने पत्र में कहा कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि इस समय ‘‘ऐतिहासिक और अव्यावहारिक है.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपसे आग्रह करती हूं कि आप ईंधन की कीमतों में तत्काल कमी करके कच्चे तेल की कम कीमतों का लाभ मध्यम श्रेणी, वेतनभोगी तबके, किसानों, गरीबों और आम आदमी को दें. ये सब लोग लंबे समय से अभूतपूर्व आर्थिक मंदी, चौतरफा बेरोजगारी, वेतन में कमी और नौकरियां खो देने के कारण भयावह संघर्ष के दौर से गुजर रहे हैं.’’

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