नई दिल्ली: कांग्रेस ने आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर से जुड़े मामले को लेकर सोमवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोला और आरोप लगाया कि ‘बैंकिंग घोटालों’ पर वह आंखे मूंदे हुए है और ‘खाने दो और भाग जाने दो’ उसका इकलौता एजेंडा बन गया है. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा कि इस सरकार में रोजाना बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ा एक नया घोटाला सामने आ रहा है. इस सरकार ने इन घोटालों पर आंख मूंद रखी है.आईसीआईसीआई बैंक से जुड़े मामले का हवाला देते हुए खेड़ा ने दावा किया कि चंदा कोचर को नोटिस जारी करने में विलंब किया गया.

उन्होंने कहा कि क्या आपने (मोदी) 2014 का चुनाव बिना एजेंडा के जीता था या आपका सिर्फ एक ही एजेंडा था-‘खाने दो और भाग जाने दो’. जनता आपको 2019 में जवाब देगी. खेड़ा ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में मोदी सरकार अपने उन मित्रों के साथ खड़ी रही है जो बैंकिंग जालसाजी में शामिल रहे. उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने स्वयं माना है कि 230 प्रतिशत एनपीए बढ़े हैं. तमाम बैंको के एनपीए अगर हम निकाल लें तो पिछले चाल सालों में 230 प्रतिशत बढ़े हैं. मार्च, 2014 में यह दो लाख 51 हजार 54 करोड़ हो गया.

किसानों के कर्ज से जुड़ी फाइलें क्यों नहीं जलती
मुंबई में आयकर विभाग की एक इमारत में आग लगने की घटना का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता ने पूछा कि आग वहीं लगती है जहां मोदी जी के बड़े करीबी उद्योगपति दोस्तों की आयकर की काली करतूतों की फाइलें होती हैं. उन स्थानों पर आग क्यों नहीं लगती जहां किसानों के कर्ज से जुड़ी फाइलें पड़ी होती है?

आरोपों की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए गए हैं
गौरतलब है कि आईसीआईसीआई बैंक के निदेशक मंडल ने बैंक की प्रबंध निदेशक और सीईओ चंदा कोचर के खिलाफ लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं. कोचर पर कुछ कर्जदारों के साथ ‘ हितों के टकराव ‘ और ‘ एक-दूसरे को फायदा पहुंचाने’ के आरोप हैं. कोचर और उनके परिवार पर वीडियोकॉन समूह को दिए गए कर्ज के मामले में एक-दूसरे को फायदा पहुंचाने का आरोप है. आरोप है कि कर्ज के बदले वीडियोकॉन समूह ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर रीन्यूएबल में निवेश किया था.

बयान भी होंगे दर्ज
बैंक ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा कि अज्ञात ‘व्हिस्ल ब्लोअर’ की ओर से कोचर के खिलाफ की गई शिकायत पर बैंक के निदेशक मंडल ने स्वतंत्र जांच का आदेश दिया है. इसमें कहा गया है कि जांच किसी स्वतंत्र और विश्वनीय व्यक्ति के नेतृत्व में होगी. जांच का दायरा विस्तृत होगा और जांच के दौरान सामने आए सभी तथ्यों और संबंधित मामलों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. इसमें फॉरेंसिक और ई-मेल की समीक्षा और संबंधित व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं.

जांच के लिए विश्वसनीय व्यक्ति की नियुक्ति
कंपनी की यह नियामकीय सूचना शेयर बाजार बंद होने के बाद आई है. इसमें आगे कहा गया है कि जांच के दौरान सामने आए सभी संबंधित मामलों को इसमें शामिल किया जाएगा ताकि मामले का अंतिम तौर पर निपटारा हो सके. बैंक की व्हिस्ल ब्लोअर नीति को ध्यान में रखते हुए निदेशक मंडल ने ऑडिट समिति को मामले की जांच करने के लिए स्वतंत्र एवं विश्वसनीय व्यक्ति का नियुक्ति करने का अधिकार दिया. साथ ही ऑडिट समिति संदर्भ की शर्तें और समय अवधि भी तय करेगी.