नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रविवार की सुबह लाल किले से कांग्रेस के ऊपर लगाए गए आरोपों पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री उच्च संवैधानिक पद पर आकर भी 24 घंटे राजनीति की बात करते हैं. क्या लाल किले से प्रधानमंत्री को ये सब करना शोभा देता है? उन्होंने कहा, बोस और पटेल को राजनीति में लेकर आना कितना सही है?

नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर प्रधानमंत्री के दिए बयान पर अभिषेक मनु सिंधवी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को इतिहास का ज्ञान नहीं है. वह उल्टा इतिहास पढ़ाते हैं. बता दें कि पीएम ने बोस द्वारा गठित आजाद हिंद फौज सरकार के गठन की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर कहा कि इस देश में एक परिवार को बड़ा साबित करने के लिए भारत मां के कई सपूतों को भुलाया गया. फिर वो वो चाहे सरदार पटेल हों, बाबा साहेब आंबेडकर हों या फिर नेताजी…राष्ट्र निर्माण में इनके योगदान को भुलाने की को कोशिश की गई.

बोस-पटेल को नहीं मिला नेतृत्व
पीएम ने कहा कि आजादी के बाद अगर देश को सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल जैसी शख्सियतों का नेतृत्व मिला होता तो देश की परिस्थितियां आज अलग होतीं. पीएम ने कहा कि सुभाष बाबू ने कैम्ब्रिज के अपने दिनों को याद करते हुए लिखा था, हम भारतीयों को ये सिखाया जाता है कि यूरोप, ग्रेट ब्रिटेन का ही बड़ा स्वरूप है, इसलिए हमारी आदत यूरोप को इंग्लैंड के चश्मे से देखने की हो गई है.

सिंघवी ने ये भी कहा
सिंघवी ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि नेताजी ने NPC नेशनल प्लानिंग कमेटी बनाई थी. इसे बाद में नेशनल प्लानिंग कमीशन बनाया गया. मोदी सरकार ने उसे ध्वस्त कर नीति आयोग का गठन किया. ऐसा करने के बाद भी नरेंद्र मोदी आडंबर रच रहे हैं. उन्होंने कहा, नेताजी ने साम्प्रदायिक संगठनों जैसे हिन्दू महासभा और मुस्लिम लीग के खिलाफ लेख लिखे थे. जब नेताजी आंदोलन कर रहे थे, तब सावरकर अभियान चला रहे थे कि ब्रिटिश सेना में भर्ती होनी चाहिए.