नई दिल्ली/भोपाल. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नोटबंदी (demonetisation) के दो साल पूरा होने के मौके पर नरेंद्र मोदी सरकार के इस कदम के खिलाफ शुक्रवार को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन किया. पार्टी के नेताओं ने कहा कि 2019 में पार्टी की सरकार बनी तो इस ‘घोटाले’ की जांच कराई जाएगी. पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार को यह पता करने के लिए श्वेत पत्र लाना चाहिए कि नोटबंदी से क्या फायदा और नुकसान हुआ. इधर, कर्नाटक में पार्टी के एक नेता और सरकार के पूर्व मंत्री टी.बी. जयचंद्र ने नोटबंदी को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी से इस्तीफे की मांग की है. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी. इसके तहत उन दिनों चल रहे 500 रुपए और एक हजार रुपए के नोट चलन से बाहर हो गए थे.

सुरजेवाला का वार- आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भोपाल में संवाददाताओं से कहा, ‘‘नोटबंदी आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला है. यदि कांग्रेस की सरकार अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के बाद केंद्र में सत्ता में आएगी, तो हम सबसे पहले नोटबंदी के घोटाले की जांच कराएंगे.’’ उन्होंने कहा कि दो साल पहले 8 नवंबर 2016 को मोदी ने नोटबंदी को आर्थिक क्रांति का नया सूत्र बताते हुए कहा था कि इससे सारा काला धन पकड़ा जाएगा, फर्जी नोट पकड़े जाएंगे और आतंकवाद एवं नक्सलवाद देश से खत्म हो जाएगा. सुरजेवाला ने दावा किया, ‘‘लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. न कालाधान विदेशों से वापस आया, न फर्जी नोट पकड़े गए और न ही आतंकवाद एवं नक्सलवाद देश से खत्म हुआ, बल्कि और बढ़ गया.’’

इधर, कर्नाटक कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री टी.बी. जयचंद्र ने शुक्रवार को नोटबंदी के मामले पर पीएम नरेंद्र मोदी से इस्तीफा देने की मांग की. जयचंद्र ने मीडिया के साथ बातचीत करते हुए कहा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी लागू करते समय जनता से 15 दिनों का समय मांगा था. वास्तविक रूप से देखें तो वह समय अब आया है. अगर पीएम नरेंद्र मोदी में जरा सा भी आत्मसम्मान बचा है तो उन्हें तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

गहलोत ने पूछा सवाल- नोटबंदी से क्या फायदा हुआ
पार्टी के संगठन महासचिव अशोक गहलोत और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में भारतीय रिजर्व बैंक के बाहर प्रदर्शन किया जहां से पुलिस ने उनको हिरासत में लिया. हालांकि कुछ देर बाद उन्हें छोड़ दिया गया. इस मौके पर गहलोत ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने 50 दिन मांगे थे और कहा था कि आतंकवाद एवं नक्सलवाद खत्म हो जाएगा तथा कालाधन खत्म हो जाएगा. अब हम प्रधानमंत्री से पूछ रहे हैं कि वह बताएं कि नोटबंदी से क्या फायदा हुए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘आरबीआई ने नोटबंदी के समय इसका विरोध किया था, लेकिन मोदी जी नहीं माने और नोटबंदी की घोषणा कर दी. प्रधानमंत्री तुगलकी फरमान जारी करके देश चलाना चाहते हैं. वित्त मंत्री भी पूरी तरह विफल हैं और प्रधानमंत्री को खुश करने के लिए बयान देते रहते हैं.’’ गहलोत ने कहा, ‘‘ हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री श्वेत पत्र जारी करें. वह बताएं कि क्या फायदे हुए और क्या बर्बादी हुई. वह पूरे देशवासियों से माफी मांगे कि उनसे गलती हो गई क्योंकि वह नए-नए प्रधानमंत्री बने थे और जोश में यह कदम उठा दिया.’’

पार्टी ने केंद्र सरकार से श्वेतपत्र लाने की मांग की
कांग्रेस ने देश के सभी राज्यों में नोटबंदी के खिलाफ प्रदर्शन किया. पार्टी ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया और इस कदम से ‘‘अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने एवं लोगों के लिए परेशानी पैदा करने’’ को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा. कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई ने जम्मू में आरबीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया. कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सुधीर शर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम किया और मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. पार्टी की त्रिपुरा इकाई ने भी नोटबंदी के खिलाफ प्रदर्शन किया. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसी विषय को लेकर बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला था और आरोप लगाया था कि मोदी सरकार का यह कदम खुद से पैदा की गई ‘त्रासदी’ और ‘आत्मघाती हमला’ था जिससे प्रधानमंत्री के ‘सूट-बूट वाले मित्रों’ ने अपने कालेधन को सफेद करने का काम किया.