केंद्र सरकार के मुताबिक उत्तराखंड में संवैधानिक व्यवस्था चरमरा गई थी। इस चरमराई हुई व्यवस्था को फिर से ठीक करने के लिए केंद्र सरकार ने बीती रात कैबिनेट की बैठक की और फिर राष्ट्रपति से इसके लिए याचिका की जिसे राष्ट्रपति ने मान लिया है। आपको बता दें की कांग्रेस इस फैसले से खुश नहीं है। बल्कि वह इस फैसले के विरोध में आज उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित हाई कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की है।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के भी नैनीताल पहुंचने की संभावना है। इसके बाद याचिका दायर कर दी जाएगी। वहीं इधर, हरीश रावत सरकार से बगावत करने वाले विधायक भी निलंबन के खिलाफ हाईकोर्ट में जाएंगे। बागी विधायकों की तरफ से वरिष्ठ वकील दिनेश द्विदी नैनीताल पहुंचे हैं। वह भी सोमवार को याचिका दायर करेंगे।

आदेश के अनुसार, विधानसभा को भंग नहीं किया गया है, बल्कि निलंबित रखा गया है। उधर, कांग्रेस और खासतौर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे हरीश रावत ने इसे संविधान और लोकतंत्र की हत्या बताया है। गौरतलब है कि रविवार को प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने के बाद ही कांग्रेस नेताओं ने कहा था कि वे इसके खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगने के ऐलान के बाद भी उत्तराखंड विधानसभा के स्पीकर रहे गोविंद सिंह कुंजवाल ने बाग़ी विधायकों की सदस्यता रद्द करने का ऐलान कर दिया। उनका कहना है की उन्हें राष्ट्रपति शासन की कोई सूचना नहीं मिली है।